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आषाढ़ मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार इस महीने तुलसी की सेवा, घी का दीपक जलाना और भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है. वहीं रविवार, एकादशी और द्वादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचने की धार्मिक मान्यता है.
फरीदाबाद: आषाढ़ का महीना भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना के लिए बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की कई परेशानियां दूर होने लगती हैं. भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए आषाढ़ मास में तुलसी की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दौरान तुलसी की सेवा, दीपक जलाना और भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना शुभ फल देता है. 30 जून 2026 से आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है और यह 29 जुलाई तक रहेगा. ऐसे में अगर इस महीने में कुछ आसान नियमों का पालन किया जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिवार में खुशहाली और सकारात्मक माहौल बना रहता है.
आषाढ़ मास भगवान लक्ष्मी नारायण को समर्पित
Local18 से बातचीत में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि आषाढ़ मास भगवान लक्ष्मी नारायण को समर्पित होता है. इसी महीने देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि इस दौरान तुलसी माता की सेवा करना बहुत शुभ माना गया है. तुलसी के बीज बोना, पौधे का नियमित सिंचन करना, तुलसी की जड़ के पास घी का दीपक जलाना और भगवान शालिग्राम के चरणों में तुलसी दल अर्पित करना विशेष फल देने वाला माना जाता है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि ऐसा करने से घर के आर्थिक संकट दूर होते हैं, धन-धान्य में वृद्धि होती है और परिवार में क्लेश व झगड़े कम होते हैं.
तुलसी पूजा के नियम
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि आषाढ़ महीने में तुलसी की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी है. रविवार, एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. रविवार और एकादशी के दिन तुलसी में जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी माता व्रत करती हैं, इसलिए उस दिन पौधे को परेशान नहीं करना चाहिए. अगर भगवान को तुलसी अर्पित करनी हो तो एक दिन पहले ही पत्ते तोड़ लेने चाहिए. रविवार के दिन तुलसी के पौधे को अनावश्यक रूप से छूने से भी बचना चाहिए.
रोज शाम को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाना शुभ
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि आषाढ़ मास में रोज शाम को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. शुक्रवार के दिन एक विशेष उपाय भी किया जा सकता है. शुक्रवार को पानी में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर तुलसी की जड़ में अर्पित करना चाहिए. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि दूध की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए क्योंकि अधिक दूध पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है. धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख, समृद्धि और बरकत का वास होता है. जिस तरह कार्तिक महीने में तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है, उसी तरह आषाढ़ मास में भी तुलसी और लक्ष्मी नारायण की पूजा का अपना अलग महत्व है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें