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बरसात में पशुओं में फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. कोडरमा में पशुपालन विभाग इसके लिए नि:शुल्क टीकाकरण अभियान चला रहा है. यह टीका आठ महीने से बड़े और गैर-गर्भवती पशुओं को साल में दो बार लगता है. समय पर टीकाकरण से पशु सुरक्षित रहेंगे और दुग्ध उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.
कोडरमा: बरसात के मौसम में बढ़ते संक्रमण के कारण पशुओं में भी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. कोडरमा प्रखंड की पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निर्मला मिंज ने बताया कि इस दौरान फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) फैलने की आशंका अधिक रहती है. उन्होंने पशुपालकों से पशुओं की विशेष देखभाल करने और समय पर एफएमडी का टीकाकरण कराने की अपील की. ताकि पशुओं को संक्रमण से बचाया जा सके और उनके स्वास्थ्य व दुग्ध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
बरसात में बढ़ जाता है एफएमडी होने का खतरा
डॉ. निर्मला मिंज ने बताया कि फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) पशुओं में होने वाला अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है. जो मुख्य रूप से गाय, बैल, भैंस, बकरी और अन्य खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है. यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में तेजी से फैलती है. इसलिए समय पर टीकाकरण ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है. उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में नमी और संक्रमण के कारण इस बीमारी के फैलने की संभावना अधिक रहती है. एफएमडी से प्रभावित पशुओं के पैरों में सूजन, मुंह और जीभ पर छाले, जीभ का मोटा होना, अधिक लार निकलना तथा चारा खाने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. बीमारी गंभीर होने पर पशुओं का दुग्ध उत्पादन घट जाता है. उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
एफएमडी टीकाकरण से होता है बचाव
डॉ. निर्मला ने बताया कि पशुपालन विभाग की ओर से विशेष टीकाकरण अभियान पूरे कोडरमा जिले में चलाया जा रहा है. इसके तहत शहरी क्षेत्रों के सभी वार्डों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पशु चिकित्सा विभाग की टीमें घर-घर जाकर पशुओं का नि:शुल्क टीकाकरण करेंगी. उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि यदि उनके पशुओं का अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है तो वे अपने निकटतम प्रखंड पशु चिकित्सालय या संबंधित पशुधन सहायक से संपर्क कर इस सुविधा का लाभ अवश्य उठाएं. उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण कराने से न केवल पशु गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता. इससे पशुपालकों की आय सुरक्षित रहती है और पशुधन का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है.
नि:शुल्क है टीकाकरण
उन्होंने बताया कि एफएमडी टीकाकरण कराते समय पशुपालकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि पशुधन की उम्र 8 महीने से अधिक हो और पशुधन गर्भवती नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि पशुधन में साल में दो बार प्रत्येक 6 महीने पर टीकाकरण कराना चाहिए. टीकाकरण पूरी तरह से बिल्कुल नि:शुल्क है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.