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सेवा धाम आश्रम में सेवा ट्रस्ट यूके भारत और समाजसेवियों के सहयोग से महिलाओं के लिए निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र की शुरुआत की गई है. जिसमें करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र में अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जिनकी मदद से प्रतिदिन लगभग 50 महिलाओं का निशुल्क उपचार किया जाएगा. यहां विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट महिलाओं की जांच कर उनकी बीमारी के अनुसार अलग-अलग थेरेपी देंगे. उपचार का लाभ लेने के लिए महिलाओं को केवल एक बार पंजीकरण कराना होगा, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह के अनुसार नियमित रूप से फिजियोथैरेपी दी जाएगी.
अंबाला: सुबह से शाम तक घर और खेत की जिम्मेदारियां निभाने वाली ग्रामीण महिलाएं अक्सर अपने दर्द को नजरअंदाज कर देती हैं. दरअसल गर्दन में जकड़न, कमर का असहनीय दर्द, घुटनों की तकलीफ और सर्वाइकल जैसी समस्याएं उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं. दर्द बढ़ने पर भी इलाज इसलिए नहीं हो पाता क्योंकि शहर तक पहुंचना आसान नहीं होता और निजी अस्पतालों में फिजियोथैरेपी का खर्च उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है. बात दे कि कई महिलाएं वर्षों तक दर्द सहते हुए केवल घरेलू नुस्खों के सहारे जिंदगी बिताने को मजबूर रहती हैं. ऐसे हालात में अंबाला के साहा स्थित सेवा धाम आश्रम से एक ऐसी पहल शुरू हुई है, जिसने हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए राहत और उम्मीद का नया रास्ता खोल दिया है.
सेवा ट्रस्ट यूके भारत और समाजसेवियों ने खोला
सेवा धाम आश्रम में सेवा ट्रस्ट यूके भारत और समाजसेवियों के सहयोग से महिलाओं के लिए निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र की शुरुआत की गई है. जिसमें करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार इस केंद्र में अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जिनकी मदद से प्रतिदिन लगभग 50 महिलाओं का निशुल्क उपचार किया जाएगा. यहां विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट महिलाओं की जांच कर उनकी बीमारी के अनुसार अलग-अलग थेरेपी देंगे. उपचार का लाभ लेने के लिए महिलाओं को केवल एक बार पंजीकरण कराना होगा, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह के अनुसार नियमित रूप से फिजियोथैरेपी दी जाएगी.
महिलाओं का फ्री में होगा इलाज
वही इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए सेवा ट्रस्ट यूके भारत के चेयरमैन नरेश मित्तल ने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों की सेवा कर रही है. सेवा धाम आश्रम में बच्चों को न केवल निशुल्क चिकित्सा सुविधा दी जाती है, बल्कि उनके पुनर्वास, पोषण और देखभाल की भी पूरी व्यवस्था की गई है. अब संस्था ने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी लंबे समय से शारीरिक दर्द झेल रही हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में उपचार नहीं करा पा रही हैं. इसी सोच के साथ महिलाओं के लिए यह फिजियोथैरेपी केंद्र शुरू किया गया है.
इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा शहर
उन्होंने बताया कि आज सर्वाइकल, कमर दर्द और जोड़ों की समस्या हर उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है. लगातार शारीरिक श्रम, गलत बैठने की आदत और समय पर इलाज न मिलने के कारण यह परेशानी गंभीर रूप ले लेती है ओर गांवों में आधुनिक फिजियोथैरेपी केंद्र नहीं होने से महिलाओं को शहर जाना पड़ता है, जहां एक-एक सत्र के लिए सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं.जिसमें गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाएं इस खर्च को वहन नहीं कर पातीं और दर्द के साथ ही जीवन बिताती रहती हैं.
वही नरेश मित्तल ने बताया कि केंद्र में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक विशेषज्ञ डॉक्टरों और फिजियोथैरेपिस्ट की टीम मौजूद रहेगी.प्रत्येक महिला का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसके लिए उपचार की योजना तैयार की जाएगी। पंजीकरण के बाद महिलाओं को 15 दिनों तक नियमित फिजियोथैरेपी दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उपचार जारी रहेगा.उनका कहना है कि इस केंद्र का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को दर्द मुक्त और बेहतर जीवन देना है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें