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मानसून में गमलों और क्यारियों में पानी भरने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और फंगल रोग तेजी से फैल सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर ड्रेनेज, मिट्टी की गुड़ाई और संक्रमित हिस्सों को हटाकर किचन गार्डन को सुरक्षित रखा जा सकता है.
शाहजहांपुर: मानसून की भारी बारिश या अत्यधिक सिंचाई आपके खूबसूरत किचन गार्डन को तबाह कर सकती है. लगातार पानी जमा रहने से पौधों की जड़ें सड़ हैं. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो पूरा का पूरा पौधा सूखकर मर जाता है. जलभराव के कारण मिट्टी में फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया का हमला तेज हो जाता है, जो अन्य स्वस्थ पौधों को भी अपनी चपेट में ले लेता है. अपने घर की हरी-भरी क्यारियों और गमलों को इस गंभीर खतरे से बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाना जरूरी है.
प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि किचन गार्डन में जलभराव पौधों के लिए सबसे घातक स्थिति है. जब जड़ें लंबे समय तक पानी में डूबी रहती हैं, तो ऑक्सीजन की कमी से वे सड़ने यानी रूट रॉट लगती हैं. इससे बचने के लिए सबसे पहले गमलों के ड्रेनेज होल को साफ करें और क्यारियों से अतिरिक्त पानी निकालने का रास्ता बनाएं. इसके बाद मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें ताकि हवा जड़ों तक पहुंचे. कुछ दिनों के लिए पानी और खाद देना बिल्कुल बंद कर दें. साथ ही, संक्रमित और फंगस लगी पत्तियों-टहनियों को तुरंत काटकर हटा दें, ताकि बीमारी अन्य पौधों में न फैले.
जड़ों का सड़ना और ऑक्सीजन की कमी
गमलों या क्यारियों में लगातार पानी जमा रहने से मिट्टी के सूक्ष्म छिद्र बंद हो जाते हैं. इससे पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है. ऑक्सीजन न मिलने के कारण जड़ें घुटने लगती हैं और धीरे-धीरे सड़ने लगती हैं. जब जड़ें ही नष्ट हो जाएंगी, तो पौधा मिट्टी से पोषक तत्व और पानी सोखना बंद कर देगा. नतीजा यह होता है कि हरा-भरा पौधा भी अचानक मुरझाकर दम तोड़ देता है.
फंगस और घातक बीमारियों का हमला
जलभराव वाली मिट्टी हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाती है. ‘रूट रॉट’ और ‘डैम्पिंग ऑफ’ जैसी फंगल बीमारियां जड़ों को खोखला कर देती हैं. यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है और देखते ही देखते तने और पत्तियों तक पहुंच जाता है. सड़ी-गली पत्तियां और फंगस लगी टहनियां पूरे गार्डन में संक्रमण फैला सकती हैं, जिससे आपके महंगे और पसंदीदा पौधे पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं.
पोषक तत्वों का नुकसान और विकास रुकना
जब आप जलभराव वाले पौधों में अतिरिक्त खाद या पानी देते हैं, तो वह फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचाता है. ऐसी स्थिति में पौधे पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता खो देते हैं. लगातार पानी भरे रहने से मिट्टी के जरूरी न्यूट्रिएंट्स भी बह जाते हैं या बेकार हो जाते हैं. पौधों का ग्रोथ पूरी तरह रुक जाता है, पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं और फल-फूल आने की संभावना हमेशा के लिए खत्म हो जाती है.
बचाव के उपाय न करने के गंभीर परिणाम
अगर समय रहते गमलों से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का रास्ता नहीं बनाया गया, तो पूरा गार्डन कुछ ही दिनों में बंजर नजर आने लगेगा. मिट्टी की गुड़ाई न करने से जड़ें कभी दोबारा सांस नहीं ले पाएंगी. संक्रमण को नजरअंदाज करने का मतलब है कि आप खुद अपने हाथों से पूरे किचन गार्डन की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं. सजगता न बरतने से आपकी क्यारियां पौधों के कब्रिस्तान में बदल सकती हैं.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें