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Palamu Mango Farming: मानसून में जब आम जाने लगता है ऐसे में भी पलामू के इस बागान में 40 से अधिक किस्मों के आम लगे हैं. यहां के बसना गांव के सतीश दुबे के बागान में कई सारे आमों का फलन हुआ है लेकिन तोतापरी किस्म सबसे अधिक पसंद की जा रही है.
पलामू. आम, जिसे फलों का राजा कहा जाता है, इसका सीजन आमतौर पर मानसून की शुरुआत के साथ खत्म होने लगता है. लेकिन पलामू जिले के बसना गांव का एक बागान इन दिनों भी आम की खुशबू और स्वाद से गुलजार है. यहां एक-दो नहीं, बल्कि 40 से अधिक किस्मों के आम लगे हैं, जिनमें कई दुर्लभ और विशेष प्रजातियां शामिल हैं. खास बात यह है कि यहां का तोतापरी आम स्वाद, गुणवत्ता और पोषण के कारण लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग इस बागान में पहुंचकर पेड़ों से ताजे आम का स्वाद लेने आते हैं.
स्वाद इतना पसंद आया कि करने लगे खेती
बसना गांव निवासी किसान सतीश दुबे ने लोकल 18 को बताया कि उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से विशेष लगाव रहा है. इसी रुचि ने उन्हें विभिन्न किस्मों के आम लगाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने आगे बताया कि तोतापरी आम का पोषण मूल्य काफी अच्छा होता है. इसमें रेशा बहुत कम होता है, गूदा अधिक होता है. उन्होंने यह पौधा उत्तर प्रदेश के बहराइच से मंगवाया था. सतीश बताते हैं कि जब वे बहराइच गए थे, तब वहां किसी ने उन्हें यह आम खाने के लिए दिया. इसका स्वाद इतना पसंद आया कि उन्होंने तय कर लिया कि इस किस्म की खेती अपने बागान में भी करेंगे.
कम ऊंचाई में ही फलन
उन्होंने यह भी बताया कि तोतापरी आम का पौधा तीन से चार वर्ष में फल देना शुरू कर देता है. वर्तमान में उनके बागान के पेड़ लगभग छह फीट ऊंचे हैं, जबकि चार फीट की ऊंचाई से ही इनमें फल लगने शुरू हो जाते हैं. कम ऊंचाई होने के कारण इसकी देखभाल और तुड़ाई भी आसान होती है. यही वजह है कि यह किस्म व्यावसायिक खेती के लिए भी किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है.
दूसरे किसानों से की अपील
सतीश दुबे ने लोकल 18 से कहा कि उनके बागान में केवल तोतापरी ही नहीं, बल्कि लंगड़ा, जर्दालू, अलफांसो, मियाजाकी सहित कई अन्य प्रसिद्ध और दुर्लभ किस्मों के आम भी मौजूद हैं. उनका कहना है कि विविध किस्मों की खेती से किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय मिल सकती है. वे अन्य किसानों से भी अपील करते हैं कि अपने घर और खेतों में फलदार पौधे जरूर लगाएं. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिवार को ताजे और पौष्टिक फल भी मिलेंगे तथा भविष्य में अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत भी तैयार होगा.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें