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झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है. इसके तहत दो बाघिन और एक बाघ को कान्हा, बांधवगढ़ या ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से लाया जाएगा. जंगल में छोड़ने से पहले इन्हें सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखकर स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि इससे प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा मिलेगा और पलामू में फिर से बाघों की स्थायी आबादी विकसित हो सकेगी. यह पहल वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को भी नई गति दे सकती है.
Palamu tiger reserve : झारखण्ड का पलामू टाइगर रिजर्व ये वो इलाका है जो किसी जमाने में बाघों के देश के नाम से मशहूर था. देश के इस हिस्से में कभी सर्वाधिक बाघ पाए जाते थे. जहां से हीं देश में सबसे पहले बाघों की गिनती शुरू हुई और पलामू टाइगर रिजर्व देश के पहले 9 टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक बना. वहीं अब फिर से बाघों की संख्या बढ़ाने को लेकर नई पहल शुरू कर दी गई है. झारखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी सामने आई है.
पीटीआर में दो बाघिन और एक बाघ लाए जाएंगे
भारत सरकार ने पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत पीटीआर में दो बाघिन और एक बाघ लाए जाएंगे, ताकि यहां बाघों की संख्या बढ़ाई जा सके और प्राकृतिक प्रजनन (ब्रीडिंग) की प्रक्रिया को गति मिले.यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी होती हैं तो वर्ष 2026 के अंतिम महीनों तक इन बाघों को पलामू के जंगलों में बसाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
पीटीआर के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि टाइगर सप्लीमेंटेशन का प्रस्ताव नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया था. मंजूरी मिलने के बाद अब पलामू टाइगर रिजर्व प्रशासन योजना के क्रियान्वयन में जुट गया है. अधिकारियों के अनुसार बाघों को कान्हा, बांधवगढ़ या ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से लाया जा सकता है. जंगल में छोड़ने से पहले उन्हें पीटीआर के सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाएगा, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच, व्यवहार और नए वातावरण के अनुरूप ढलने की वैज्ञानिक निगरानी की जाएगी.
उन्होंने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व इस पूरी प्रक्रिया में सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व के सफल मॉडल को अपनाएगा. इन दोनों अभयारण्यों में टाइगर सप्लीमेंटेशन के बाद बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पीटीआर प्रशासन का मानना है कि इसी मॉडल पर काम कर पलामू में भी बाघों की स्थायी आबादी विकसित की जा सकती है. पिछले दो-तीन वर्षों में रिजर्व क्षेत्र में सात नर बाघों की आवाजाही दर्ज की गई है, लेकिन बाघिन की उपस्थिति नहीं मिलने से प्राकृतिक प्रजनन संभव नहीं हो पा रहा था. इसी कारण फीमेल सप्लीमेंटेशन को आवश्यक माना गया.
उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बाघों के लिए बेहतर आवास तैयार करने की दिशा में लगातार काम किया गया है. ग्रासलैंड का विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाना, पशु चिकित्सा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे कई स्तरों पर सुधार किए गए हैं. उन्होंने कहा कि टाइगर सप्लीमेंटेशन केवल बाघों की संख्या बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे वन परिदृश्य और जैव विविधता के पुनर्जीवन की एक महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने आगे बताया कि पिछले तीन वर्षों में पलामू टाइगर रिजर्व में सात बाघों की मौजूदगी के प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) और अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) प्रमाण मिले हैं. इनमें कैमरा ट्रैप से डायरेक्ट साइटिंग के साथ-साथ पगमार्क, स्कैट (मल) सैंपल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बाघों की गतिविधियों की पुष्टि की गई है. उन्होंने कहा कि स्वयं उनके द्वारा भी तीन बाघों की डायरेक्ट साइटिंग की जा चुकी है. यह संकेत देता है कि पलामू का जंगल अब भी बाघों के लिए उपयुक्त आवास बना हुआ है और टाइगर सप्लीमेंटेशन के बाद यहां उनकी संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है.
आगे कहा कि वर्ष 1973 में स्थापित पलामू टाइगर रिजर्व देश के पहले नौ टाइगर रिजर्व में शामिल है और झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व है. करीब 1,146 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र राज्य का प्रमुख पर्यटन केंद्र भी है. बेतला नेशनल पार्क में हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक पहुंचते हैं और हाल के वर्षों में पर्यटकों द्वारा दो बार बाघ देखे जाने की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं. उन्होंने कहा कि यदि टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम सफल रहता है तो इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी, बल्कि पलामू में इको-टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा.
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8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें