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Palamu Less Rainfall: पलामू में इस बार कम बारिश की संभावना है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. अगर अगले 15 दिनों में भी जरूरत के मुताबिक बारिश नहीं होती है तो कुछ खास तरह की फसलों को नहीं बोया जा सकेगा. इसके समाधान के रूप में एक्सपर्ट ने बताया कि बारिश का इंतजार किए बिना कम पानी वाली फसलें लगाएं.
पलामू. इस बार मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार पलामू में सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना है. वहीं, पलामू जिले में इस वर्ष सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण सुखाड़ की आशंका गहराने लगी है. जून और जुलाई में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. विनोद सिंह ने लोकल 18 को बताया कि मौसम में यह बदलाव एल नीनो (El Nino) के प्रभाव का परिणाम हो सकता है. सामान्य तौर पर इस समय तक जिले में करीब 549 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 169 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है. बारिश की इस भारी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने लगा है.
एल नीनो का असर, सरकार भी कर रही निगरानी
कृषि विज्ञान केंद्र, पलामू के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार पांडे ने बताया कि मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पलामू में सुखाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस वर्ष एल नीनो का प्रभाव साफ रूप से दिखाई दे रहा है, जिसके कारण मानसून कमजोर पड़ा है. इस स्थिति को देखते हुए सरकार भी लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है और किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है.
मक्का और धान की खेती पर सबसे अधिक असर
उन्होंने बताया कि कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ की प्रमुख फसलों पर पड़ रहा है. अगर अगले 15 दिनों तक अच्छी बारिश नहीं होती है, तो किसानों के लिए मक्का की बुआई करना भी मुश्किल हो जाएगा. वहीं, जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है, वे भी पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण रोपाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं. अगर जुलाई के भीतर अच्छी वर्षा हो जाती है, तो धान की रोपाई संभव हो सकेगी. अन्यथा किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की सलाह
विशेषज्ञ ने आगे बताया कि किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए केवल धान पर निर्भर नहीं रहने की सलाह दी है. बारिश में और देरी होती है, तो किसान कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मड़ुआ (रागी), तिल, सरगुजा और बाजरा जैसी फसलें कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं. इन फसलों की खेती अपनाकर किसान आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
समय पर निर्णय लेना होगा जरूरी
उन्होंने बताया कि मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है और किसानों को समय-समय पर आवश्यक सलाह दी जा रही है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो किसानों को बिना देर किए वैकल्पिक फसलों की बुआई शुरू कर देनी चाहिए. इससे फसल पूरी तरह खराब होने का खतरा कम होगा और किसानों को इस मौसम में भी बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बनी रहेगी.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें