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Urea worries are over! Learn the truth about that ‘magical plant’ hidden...


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यूरिया की टेंशन होगी खत्म! जानिए खेत में छिपी उस ‘जादुई वनस्पति’ का सच

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Tips for Basmati paddy cultivation: बासमती धान की रिकॉर्ड पैदावार और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को रोपाई से पहले ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद को खेत में मिला दें. 40-45 दिन की कोमल फसल को मिट्टी में पलटने से यूरिया की खपत 30% तक कम होती है और भूमि उपजाऊ बनती है.

शाहजहांपुर: बासमती धान की बंपर पैदावार और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को हरी खाद को मिट्टी में अच्छी तरह से मिला लें. धान की रोपाई से पहले ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद को मिट्टी में मिलाना बेहद फायदेमंद साबित होता है. इससे न सिर्फ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि भूमि की जलधारण क्षमता और ऊर्वरा शक्ति में भी भारी इजाफा होता है. सही समय पर हरी खाद की जुताई कर उसे खेत में सड़ने देने से बासमती की फसल को भरपूर पोषण मिलता है, जिससे पैदावार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि हरी खाद का पूरा लाभ लेने के लिए ढैंचा या सनई की फसल को 40 से 45 दिन की अवस्था में ही मिट्टी में पलट देना चाहिए. इस समय पौधे कोमल और रसीले होते हैं, जिससे वे मिट्टी में जल्दी सड़कर नाइट्रोजन और कार्बनिक तत्वों में बदल जाते हैं. अगर फसल में फूल आने लगे या तना सख्त हो गया, तो इसे गलने में अधिक समय लगेगा और बासमती की रोपाई में देरी हो सकती है. जुताई के बाद खेत में थोड़ा पानी जमा रखना चाहिए ताकि खाद अच्छी तरह डीकंपोज हो सके और बासमती के पौधों को तुरंत पोषण मिले.

हरी खाद के मुख्य फायदे और महत्व
हरी खाद मिट्टी को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन और जीवांश देती है. ढैंचा और सनई जैसी फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे यूरिया की खपत लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है. इसके प्रयोग से ऊसर और कमजोर जमीन भी उपजाऊ बनने लगती है. यह मिट्टी के भौतिक और रासायनिक ऊतकों में सुधार कर उसकी जल सोखने की क्षमता को बढ़ाती है, जिससे बासमती के दानों में चमक और गुणवत्ता आती है.

बासमती की रोपाई से पहले मिलाने की विधि
बासमती की रोपाई करने से करीब 12 से 15 दिन पहले हरी खाद को मिट्टी में मिलाना सबसे उत्तम माना जाता है. इसके लिए खेत में हल्का पानी लगाकर डिस्क हैरो या रोटावेटर की मदद से हरी खाद की जुताई की जाती है. जुताई के बाद खेत में पानी भरकर छोड़ दिया जाता है, जिससे पौधे सड़कर पूरी तरह खाद का रूप ले लें. जब यह हरी वनस्पति मिट्टी का हिस्सा बन जाती है, तब बासमती की कद्दू करके रोपाई की जाती है.

ढैंचा और सनई की सही जुताई का तरीका
अगर आपने खेत में ढैंचा और सनई बोई है, तो ध्यान रखें कि इसकी जुताई तब करें जब पौधों की ऊंचाई लगभग 3 से 4 फीट हो. इस अवस्था में तने मुलायम होते हैं. जुताई के लिए पहले कल्टीवेटर या हैरो चलाकर पौधों को जमीन पर गिराया और काटा जाता है. इसके तुरंत बाद रोटावेटर चलाकर इन्हें मिट्टी के अंदर अच्छी तरह दबा देना चाहिए. जुताई हमेशा सुबह या शाम के समय करें ताकि मिट्टी की नमी का सही उपयोग हो सके.

हरी खाद का पूरा लाभ लेने के उपाय
हरी खाद का शत-प्रतिशत लाभ लेने के लिए जुताई के बाद खेत में कम से कम 5 से 7 सेंटीमीटर पानी भरकर 10 दिनों के लिए छोड़ दें. अगर सड़ने की प्रक्रिया धीमी हो, तो प्रति एकड़ 10-15 किलोग्राम यूरिया या सिंगल सुपर फास्फेट का छिड़काव कर सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया तेजी से काम करते हैं. जब ढैंचा-सनई पूरी तरह गलकर मिट्टी में मिल जाए, तभी धान की रोपाई शुरू करें ताकि बासमती के शुरुआती विकास को भरपूर जैविक ताकत मिल सके.

About the Author

Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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