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ट्रेन के AC कोच में हर दिन शर्मनाक कांड, बेहिचक देते हैं...


Indian Railways News: इंडियन रेलवे का नेटवर्क काफी विशाल है. इसे भारत का नेशनल कैरियर भी कहा जाता है, क्‍योंकि ट्रेन से हर दिन हजारों-लाखों की तादाद में लोग यात्रा करते हैं. ट्रेन के AC कोच से यात्रा करना किसी लग्‍जरी से कम नहीं होता है. AC-3, AC-2 और AC-1 कोच से रोजाना लाखों की संख्‍या में यात्री सफर करते हैं. ट्रेन के इसी AC कोच को लेकर शर्मनाक मामला सामने आया है. साल 2022 से मई 2026 तक इन्‍हीं AC कोचेज से 12700000 बेडशीट, तकिये के कवर, कंबल और तौलिये चोरी कर लिए गए. बेडशीट चोरी के मामले में बीकानेर, तौलिया चोरी के मामले में दिल्‍ली, तकिये का कवर चुराने के मामले में सोनपुर और कंबल चारी के मामले में जोधपुर क्षेत्र टॉप पर है. चोरी के जरिये बेडरोल मुहैया कराने वाले कॉन्‍ट्रैक्‍टर को 100 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का चूना लगाया गया है. हालांकि, ठेकेदार इस नुकसान की भरपाई स्‍टाफ के वेतन से पैसे काटकर करता है. भारतीय रेल अब AC कोच के इन चोरों के खिलाफ सख्‍ती बरतने के मूड में है. ऐसे यात्रियों या फिर स्‍टाफ के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जा सकती है.

दरअसल, इंडियन रेलवे AC कोच से सफर करने वाले यात्रियों को बेडरोल भी मुहैया कराता है, जिसका शुल्‍क टिकट में ही जुड़ा होता है. बेडरोल में कंबल, बेडशीट, तौलिया, तकिया और तकिये का कवर शामिल होते हैं. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, AC बोगी से सफर करने वाले हर 1000 पैसेंजर्स में से 1 यात्री चोरी की घटना को अंजाम देते हैं. रेलवे के 18 जोन के सभी 69 डिवीजनों से बेडरोल चोरी के बारे में सूचना का अधिकार कानून के तहत इस बाबत जानकारी मांगी गई थी. इनमें से 16 रेलवे जोन के 54 मंडलों की तरफ से जवाब दिया गया. रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल के पीसेज चोरी किए गए. रेलवे का कहना है कि चोरी की अधिकांश घटनाओं में AC कोच से सफर करने वाले पैसेंजर्स शामिल हैं. साल 2022 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में 56 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बता दें कि कोरोना संक्रमण काल के बाद जनवरी 2022 से बेडरोल देने की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई थी.

₹104 करोड़ की चपत

भारतीय रेलवे की ट्रेनों से यात्रियों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले बेडरोल (चादर, कंबल, तकिया कवर आदि) की चोरी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों से अधिक की अवधि में बेडरोल की चोरी के कारण ठेकेदारों को लगभग 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. चोरी की ये घटनाएं यात्रियों के व्यवहार और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

देशभर के विभिन्‍न जोन में हर रात 8 लाख पैसेंजर्स को बेडरोल दिया जाता है.

10 रेल मंडल में सबसे ज्‍यादा चोरी

आंकड़ों के अनुसार, बेडरोल चोरी के सबसे अधिक मामले देश के 7 रेलवे जोनों के 10 रेल मंडलों में दर्ज किए गए हैं. इन मंडलों में राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और जयपुर, झारखंड का रांची, दिल्ली, मुंबई, गुजरात का अहमदाबाद, बिहार के सोनपुर और दानापुर तथा छत्तीसगढ़ का बिलासपुर शामिल हैं. इन 10 मंडलों में कुल चोरी की लगभग 67 प्रतिशत घटनाएं दर्ज हुई हैं. रेलवे के लिए बेडरोल उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों के कर्मचारियों का दावा है कि चोरी होने वाले सामान का आर्थिक बोझ अक्सर उन्हीं पर पड़ता है. कोच अटेंडेंट्स का कहना है कि कई मामलों में चोरी हुए लिनेन की लागत उनके वेतन से वसूली जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

इन दो रेल मंडलों के यात्री ईमानदार

भारतीय रेलवे के एसी कोचों से बेडरोल और लिनेन चोरी के मामलों के बीच दक्षिण रेलवे के दो मंडलों (तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़) से राहत भरी खबर सामने आई है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों मंडलों में बेडरोल या लिनेन चोरी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है. वहीं, दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल ने भी चोरी का कोई मामला नहीं होने की जानकारी दी है. हालांकि, आद्रा एक मालगाड़ी (फ्रेट) केंद्रित मंडल है, जहां एसी यात्री कोच संचालित नहीं होते. ऐसे में वहां लिनेन चोरी की संभावना स्वाभाविक रूप से नहीं है. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ मंडलों का रिकॉर्ड बेहतर निगरानी और यात्रियों की जागरूकता का संकेत देता है.

दोषियों पर एक्‍शन

रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि रेलवे लिनेन चोरी रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि रेलवे स्टाफ की चोरी में मिलीभगत रही है. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यात्रियों में सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है जितना सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना.



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