नई दिल्ली (Sonali Thudu Viral Video). देश में आज भी लाखों बेटियों के लिए पढ़ाई करना किसी बड़े संघर्ष से कम नहीं है. उनके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा उनकी काबिलियत या उनके सपने नहीं, बल्कि घर की गरीबी बनती है. हर साल न जाने कितनी ही मासूम बच्चियां सिर्फ इसलिए स्कूल जाना छोड़ देती हैं कि उनके माता-पिता के पास फीस भरने के पैसे नहीं होते. ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली कहानी सोशल मीडिया पर हर किसी की आंखें नम कर रही है. यह कहानी झारखंड के दूरदराज गांव में रहने वाली 14 साल की सोनाली थुडू की है, जिसका नर्स बनने का सपना गरीबी की वजह से दम तोड़ने वाला था.
कच्चे मकान का अंधेरा और टूटने की कगार पर खड़ा सपना
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‘सर, मेरा सपना है कि मैं पढ़-लिखकर नर्स बनूं’
जब पढ़ाई जारी रखना बिल्कुल नामुमकिन लगने लगा, तभी सोनाली की मुलाकात शिक्षक अलख पांडे से हुई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सोनाली बेहद मासूमियत और उम्मीद भरी नजरों से अलख पांडे से कहती है- सर, मेरा सपना है कि मैं पढ़-लिखकर नर्स बनूं. बच्ची की आंखों में पढ़ने की वो तड़प और उसका पक्का इरादा देखकर अलख पांडे का दिल पिघल गया. उन्होंने बिना एक पल गंवाए सोनाली से पूछा- बताइए, आपका एडमिशन किस स्कूल में कराना है? आप कहां पढ़ना चाहती हैं? सोनाली ने तपाक से अपने पसंदीदा स्कूल ‘सेंट मैरी रेजिडेंशियल हाईस्कूल’ का नाम ले लिया.
अलख पांडे ने उसी दिन स्कूल पहुंचकर जमा की फीस
इस कहानी का सबसे खूबसूरत मोड़ इसके बाद आता है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, अलख पांडे ने केवल दिलासा नहीं दिया, बल्कि वे उसी दिन सीधे सेंट मैरी स्कूल पहुंच गए. उन्होंने वहां जाकर न सिर्फ सोनाली का एडमिशन कराया, बल्कि उसके पूरे साल की स्कूल फीस भी अपनी जेब से जमा कर दी. इस तरह 14 साल की सोनाली का नाम कक्षा 9वीं में दर्ज हो गया और उसकी जिंदगी की एक नई और सुनहरी शुरुआत हुई.
नई यूनिफॉर्म और इंटरनेट पर दुआओं की बौछार
वीडियो के आखिरी हिस्से में दिखने वाला मंजर किसी भी संवेदनशील इंसान को भावुक कर सकता है. सोनाली अपनी नई स्कूल यूनिफॉर्म पहने, पीठ पर बस्ता टांगे बेहद खुशी-खुशी नई क्लास की तरफ बढ़ती नजर आ रही है. उसके चेहरे की मुस्कान बता रही है कि उसके सपनों को पंख मिल चुके हैं. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स अलख पांडे पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- किसी जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा का तोहफा देना दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य है. अन्य ने कमेंट किया- ऐसे मददगार लोग हर बच्चे का हाथ थाम लें तो झुग्गियों और गांवों से भी डॉक्टर-आईएएस अफसर निकलने लगेंगे.
सोनाली की कहानी सिखाती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला सच्चा हो तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं.