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Bokaro Mei Bailgaadi Per Aayi Barat: बोकारो के जनार्दन महतो ने बैलगाड़ी से बारात निकालकर और बिना दहेज के शादी कर समाज के सामने नई मिसाल पेश की. उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं को अपनाया. उनकी यह खास शादी पूरे जिले में खूब चर्चित है.
बोकारो. सोशल मीडिया पर इन दिनों बोकारो की एक अनोखी शादी की जमकर चर्चा हो रही है जहां आज के दौर में शादियों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं और दूल्हे लग्जरी कारों में बारात लेकर पहुंचते हैं, वहीं बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के तेलियाडीह टागंटोना गांव के जनार्दन महतो ने बैलगाड़ी से बारात निकालकर और बिना दहेज के विवाह कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की
खास बातचीत में दूल्हे जनार्दन महतो ने बताया कि उनका विवाह उनके पूर्वजों की परंपरा और कुरमाली समाज के पारंपरिक रीति-रिवाज (निगाचारी) के अनुसार संपन्न हुआ उनका मानना है कि आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूलते जा रहे हैं इसलिए उन्होंने शादी में पुरानी परंपराओं को अपनाने का निर्णय लिया
शिक्षकों से मिली दहेज मुक्त विवाह की प्रेरणा
जनार्दन ने बताया कि बचपन में स्कूल के दौरान उनके शिक्षक दहेज प्रथा से होने वाली सामाजिक बुराइयों और महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के बारे में बताते थे तभी उन्होंने संकल्प लिया था कि जीवन में कभी दहेज नहीं लेंगे उन्होंने बताया कि इस फैसले को मजबूत करने में उनके शिक्षक अशोक सर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने हमेशा उन्हें सही सोच के लिए प्रेरित किया
वहीं इस अनोखी बारात को यादगार बनाने में गांव के लोगों ने भी अहम योगदान दिया बैलगाड़ी की सुंदर सजावट और रंग-रोगन का कार्य मिथिलेश महतो ने किया, जबकि सजावट को अंतिम रूप देने में भुवनेश्वर महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने सहयोग किया
शुरुआत में था लोगों की सोच का डर
जनार्दन ने बताया कि उन्हें शुरुआत में थोड़ा डर भी था कि कहीं लोग यह न समझें कि उन्होंने पैसे बचाने के लिए बैलगाड़ी से शादी करने का फैसला लिया है हालांकि दोनों परिवारों ने उनके निर्णय का पूरा समर्थन किया और रिश्तेदारों ने भी इस पहल की सराहना की और पूरे उत्साह के साथ बारात में शामिल हुए
5 किलोमीटर बैलगाड़ी से पहुंची बारात
करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित बगदा गांव तक बैलगाड़ी से बारात पहुंची शादी के बाद दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से ही हुई वर्षों बाद इलाके के लोगों ने इस तरह की पारंपरिक बारात और विदाई का नजारा देखा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे थे
युवाओं को दिया खास संदेश
जनार्दन महतो ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आधुनिकता को अपनाना गलत नहीं है, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूल सही नहीं है उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने रीति-रिवाजों को याद रखना चाहिए, उन्हें संजोकर रखना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए
दुल्हन बोलीं- बैलगाड़ी से विदाई पर हुआ गर्व
दुल्हन श्वेता ने बताया कि जब लोगों को पता चला कि उनकी बारात बैलगाड़ी से आएगी तो कई लोगों ने मजाक भी किया हालांकि, उन्हें इस बात से बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हुई उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी इस शादी पर गर्व है बैलगाड़ी से हुई बारात और विदाई उनके लिए यादगार अनुभव रहा और हर किसी को अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और नई पीढ़ी के बीच इस तरह की पारंपरिक शादी पहली बार देखने को मिली, जिसे लेकर गांव के लोग भी काफी उत्साहित नजर आए.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें