भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

‘सिंदूरा’ के बिना नहीं होती झारखंड-बिहार में बेटी की शादी, दूर से...


Last Updated:

Sindoora Importance: झारखंड-बिहार की शादियों में सिंदूरा खरीदने की परंपरा आज भी कायम है. इसे वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. विवाह से पहले इसे लिया जाता है और इसमें सुहाग का सामान रखा जाता है. इससे जुड़ी खास परंपरा है कि बाजार में इसे पसंद करते समय दूर से ही देखना होता है, अगर किसी सिंदूरा को छू लिया तो उसे खरीदना पड़ता है. कहते हैं ऐसा करना शुभ होता है.

ख़बरें फटाफट

जमशेदपुर. झारखंड और बिहार की पारंपरिक शादियों में कई ऐसी रस्में होती हैं, जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है. इन्हीं परंपराओं में से एक है सिंदूरा खरीदना, जो विवाह से पहले लिया जाता है और इसे बेहद शुभ माना जाता है. आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में रहने वाले परिवार इस परंपरा को पूरे सम्मान के साथ निभाते हैं. शादी की तैयारियों के दौरान जब परिवार के लोग बाजार में सिंदूरा खरीदने जाते हैं, तो उससे जुड़ी कई मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है.

हाथ लग गया तो खरीदना पड़ता है
साकची बाजार के दुकानदार दिलीप कुमार बताते हैं कि सिंदूरा केवल एक सामान नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सिंदूरा खरीदते समय उसे पहले दूर से देखकर पसंद किया जाता है. लोग बिना जरूरत उसे हाथ नहीं लगाते. परंपरा के अनुसार, अगर किसी सिंदूरा को खरीदने की नीयत से हाथ लगा दिया जाए, तो उसे वापस नहीं रखा जाता और उसे खरीदना शुभ माना जाता है. यही कारण है कि लोग सिंदूरा चुनते समय काफी सावधानी बरतते हैं.

बहुत संभालकर रखा जाता है
सिंदूरा आमतौर पर पीतल, तांबा या अन्य धातुओं से बना होता है. इसमें सुहाग और विवाह से जुड़ी कई शुभ वस्तुएं रखी जाती हैं. इसे पूरी तरह बंद रखा जाता है और इसका ढक्कन भी अलग नहीं किया जाता. माना जाता है कि सिंदूरा जितना सुरक्षित और संपूर्ण रहेगा, वैवाहिक जीवन में उतनी ही खुशहाली बनी रहेगी. शादी के दौरान इसे विशेष पूजा और रस्मों में शामिल किया जाता है.

अंदर रखी जाती हैं सात चीजें
परंपरा के अनुसार, सिंदूरा के अंदर सात प्रकार की शुभ सामग्री रखी जाती है. इनमें प्रमुख रूप से सिंदूर, कंघी, आईना, बिंदी, चूड़ी, महावर या आलता तथा श्रृंगार से जुड़ी अन्य वस्तुएं शामिल होती हैं. इन सभी वस्तुओं का संबंध सुहाग और सौभाग्य से माना जाता है. यही वजह है कि सिंदूरा को नवविवाहित दुल्हन के लिए शुभ उपहार के रूप में भी देखा जाता है.

सौभाग्य और शुभता का प्रतीक
बुजुर्गों का कहना है कि सिंदूरा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि परिवार की भावनाओं और संस्कारों से जुड़ा हुआ प्रतीक है. विवाह के समय माता-पिता अपनी बेटी को यह देकर उसके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं. कई परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के तहत विशेष डिजाइन वाले सिंदूरा का उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी सांस्कृतिक पहचान और भी मजबूत हो जाती है.

कम नहीं हुआ महत्व
आधुनिक समय में भले ही शादी की कई रस्मों में बदलाव आया हो, लेकिन झारखंड और बिहार में सिंदूरा का महत्व आज भी बरकरार है. बाजारों में शादी के मौसम के दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है. यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का काम करती है और आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय विवाह संस्कारों की खूबसूरती को पहुंचाती है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top