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भास्कर एक्सक्लूिसव साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए रोज नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इस बार आंगनबाड़ी सेविकाओं को टारगेट बनाया है। समाज कल्याण विभाग का कर्मचारी बनकर सेविकाओं को फोन कर उनसे पोषण ट्रैकर का पासवर्ड पूछ रहे हैं। एक सेविका ने बताया कि उन्हें 8969376098 नंबर से फोन कर पासवर्ड पूछ रहा था। गौरतलब है कि पोषण ट्रैकर में सेविकाओं के आधारकार्ड, पैनकार्ड सहित कई दस्तावेज अपलोड रहते हैं, जबकि इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों की लाभुक महिलाओं (गर्भवती, धात्री और किशोरियों) के भी आधार कार्ड और बैंक पासबुक अपलोड रहते हैं। अगर साइबर ठगों को पोषण ट्रैकर का पासवर्ड मिल गया, तो कई महिलाओं के बैंक खाता खाली कर देंगे। कई घटनाएं ऐसी हो चुकी हैं। गरीब महिलाओं के बैंक खाते से पैसे निकाल लिए गए। हालांकि खाते में कम पैसे होने और गांव की महिलाएं होने के कारण ये मामले साइबर थाना तक नहीं पहुंच पाए। चास प्रखंड की कई सेविकाओं से मांगा पासवर्ड चास प्रखंड की कई सेविकाओं के पास फोन आया। कोलबेंदी व बारपोखर सहित कई पंचायतों की कई सेविकाओं ने बताया कि उनके पास फोन आया, खुद को समाज कल्याण विभाग का कर्मचारी बताकर पोषण ट्रैकर का पासवर्ड मांग रहा था। इसकी सूचना कई सेविकाओं ने महिला पर्यवेक्षिकाओं को दी, तो उन्होंने किसी को भी पासवर्ड शेयर करने से मना कर दिया। चंद्रपुरा की दो लाभुक महिलाओं के खाते से निकाले पैसे सोमवार को चंद्रपुरा प्रखंड की पीएमवीवाई की दो लाभुक महिलाओं से जानकारी ली गई। एक महिला के खाते से 4 हजार रुपए निकाल लिए, जबकि दूसरे महिला का ओटीपी आने के बावजूद उसके खाते से पैसे नहीं निकाल पाया। हालांकि महिलाओं ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वे इसे हाईलाइट नहीं करना चाहतीं। इतनी कम राशि के लिए उन्हें पुलिस के झमेले में नहीं पड़ना है। महिलाओं ने सेविका के माध्यम से इसकी शिकायत सीडीपीओ ऑफिस की महिला सुपरवाइजर तक पहुंचाई, लेकिन यह मामला उनके बस का नहीं था। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित महिलाएं भी चार हजार रुपए के लिए थाने में शिकायत नहीं की। ऐसे समझें, एक नजर में आंगनबाड़ी व लाभुक {जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 2255 है {आंगनबाड़ी सेविकाएं 2250 {पोषण ट्रैकर पर लाभुकों की संख्या 214225 है {सबसे ज्यादा लाभुक चास ग्रामीण परियोजना में 32110 ऐसे समझें, क्या है पोषण ट्रैकर {आंगनबाड़ी सेविकाओं का आधिकारिक मोबाइल ऐप। {इसमें गर्भवती व धात्री महिलाओं और बच्चों का रिकॉर्ड रहता है। {लाभुकों के आधार, बैंक विवरण आदि जानकारी दर्ज होती है। {इसलिए इसका पासवर्ड अत्यंत गोपनीय है। पवन कुमार, डीएसपी सह साइबर सेल इंचार्ज साइबर अपराधी कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। इस तरह का कॉल आने पर अपनी निजी व गोपनीय जानकारी किसी को नहीं दें। विभाग के अधिकारी या कर्मचारी किसी से भी आधार नंबर या पासवर्ड नहीं पूछते। गोपनीय जानकारी किसी को शेयर न करें। इसकी शिकायत टॉल फ्री नंबर 1930 पर करें। इस नंबर पर शिकायत होते ही जिस नंबर से कॉल आ रहा है, उसे ट्रेस कर लिया जाता है, वह देश के किसी भी हिस्से में हो, वहां की पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी। 1930 नंबर पर शिकायत होने पर जबतक आरोपी पकड़ा नहीं जाता है, तब तक केस खत्म नहीं होगा, इसलिए ऐसे मामलों में 1930 नंबर पर जरूर शिकायत करें। भास्कर एक्सपर्ट
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