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China vs West : चीन ने पिछले साल अक्टूबर में ही रेयर अर्थ के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही थी, जिसके बाद से अमेरिका-यूरोप सहित तमाम पश्चिमी देश घबराए हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि अगर चीन ने रेयर अर्थ के निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया तो 6.5 ट्रिलियन डॉलर के बिजनेस पर खतरा मंडराने लगेगा.
चीन ने रेयर अर्थ के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है.
नई दिल्ली. अमेरिका एक तरफ तो टैरिफ और युद्ध के जरिये दुनिया में अपनी धाक जमाने और एकतरफा फायदे की बात कर रहा है. दूसरी ओर, चीन ने सिर्फ एक दांव चलकर अमेरिका सहित पूरे पश्चिमी देश के कारोबार को मुश्किल में डाल दिया है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का कहना है कि चीन के रेयर अर्थ के निर्यात पर शिकंजा कसने की वजह से अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देश मुश्किल में दिख रहे हैं. इस कदम से यूरोप और अमेरिका के 6.5 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री पर जोखिम बढ़ने लगा है.
आईईए की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर चीन ने अपने रेयर अर्थ निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी तो पश्चिमी देशों के एयरोस्पेस से लेकर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन एनर्जी जैसे तमाम प्रोजेक्ट पर खतरा पैदा हो सकता है. चीन रेयर अर्थ का सबसे बड़ा उत्पादक है और उसने पिछले साल अक्टूबर में ही इसके निर्यात पर रोक लगाने के साथ ही लाइसेंस के नियमों को भी सख्त कर दिया था. चीन ने इस प्रतिबंध को 2026 के आखिर तक पूरी तरह लागू करने की बात कही है. एनर्जी एजेंसी का कहना है कि इस फैसले से दुनियाभर में रेयर अर्थ की सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
17 एलीमेंट से बनता है रेयर अर्थ
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फातेह बिरोल का कहना है कि रेयर अर्थ की सप्लाई पर चीन का कंट्रोल बढ़ता है तो दुनियाभर के कारोबार पर असर पड़ सकता है. रेयर अर्थ को 17 छोटे-छोटे एलीमेंट को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, एयरक्राफ्ट, स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर, पवन चक्की की टरबाइन और एडवांस्ड वेपन सिस्टम में किया जाता है.
ग्रेफाइट के निर्यात पर भी शिकंजा
ऊर्जा एजेंसी ने कहा है कि चीन ने ग्रेफाइट के निर्यात पर भी रोक लगाने की बात कही है, जिसका इस्तेमाल ई-वाहनों की बैटरियां बनाने में होता है. अगर चीन ने ग्रेफाइट के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दिया तो यह चीन के बाहर 300 अरब डॉलर के प्रोडक्डशन पर जोखिम पैदा कर सकता है. चीन अभी दुनिया का 90 फीसदी ग्रेफाइल प्रोसेस करता है, जो उसकी एकतरफा ताकत को दिखाता है.
चीन पर निर्भरता घटा रहे पश्चिमी देश
ऊर्जा एजेंसी की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पश्चिमी देशों ने चीन पर अपनी ऊर्जा निर्भरता घटाने की बात कही है. यही वजह है कि वहां की सरकारों ने साल 2023 से 2025 के बीच ऐसे मिनरल की खोज पर 65 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं. अमेरिका और मलेशिया ने तो रेयर अर्थ का उत्पादन बढ़ाने पर काम भी शुरू कर दिया है. आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में चीन का रेयर अर्थ उत्पादन दुनिया के मुकाबले 85 फीसदी पर आ गया है, जो 2023 तक 90 फीसदी था. अनुमान यह भी है कि साल 2035 तक चीन की हिस्सेदारी गिरकर 70 फीसदी तक आ सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें