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रांची में सरकारी एंबुलेंस वेंटिलेटर पर है। जिले को आवंटित 55 में करीब 27 एंबुलेंस कंडम हैं। सदर अस्पताल, रिम्स और प्रखंडों में एंबुलेंस सड़ रहे हैं। पुरानी एंबुलेंस तो झाड़ियों से ढंक गई हैं। जबकि, चार साल पहले खरीदी गई बड़ी एंबुलेंस के चारों ओर झाड़ियां उग गई है। एंबुलेंस के अंदर से बाहर जंग लग रहे हैं। जो एंबुलेंस चल रहे हैं वह भी जवाब दे रहे हैं। क्योंकि, अधिकतर एंबुलेंस लाखों किमी का सफर तय कर चुके हैं। इन एंबुलेंस का मेंटनेंस नहीं होने की वजह से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी एंबुलेंस के दम तोड़ने की वजह से रांची में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने या वहां से घर ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए मरीज को काफी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। बजरा स्थित सर्विस सेंटर में खड़ी हैं दर्जनों ऑफ रोड एंबुलेंस
स्थिति यह है कि रांची स्थिति बजरा के निजी सर्विस सेंटर में मरम्मत के लिए दर्जनों 108 एंबुलेंस महीनों से खड़ी है। सर्विस सेंटर के कर्मी ने बताया कि कुछ गाड़ियों के सर्विस में आए एक माह से ज्यादा हो गया है। नियमित एंबुलेंस आती हैं और सर्विसिंग के बाद वापस चली जाती हैं। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
पुरानी एंबुलेंसों का हाल
पूर्व से संचालित करीब 543 एंबुलेंसों में 80 से ज्यादा ऑफ रॉड हैं। नतीजा यह है कि ये एंबुलेंस सर्विस सेंटर के बाहर मरम्मत के नाम पर महीनों से खड़ी है।
रिम्स या राज्य के किसी भी अस्पतालों में मरीज को पहुंचाने के क्रम में अधिकांश एंबुलेंस में वेंटिलेटर तक की व्यवस्था नही है। कई एंबुलेंस में वेंटिलेटर खराब हैं।
एंबुलेंस में इमरजेंसी किट की व्यवस्था 50% से ज्यादा में नहीं है।
40% एंबुलेंसों में शीशे टूटे हुए हैं, किसी में मॉनिटर खराब, किसी में दरवाजे को रस्सी से बांध रखा है। कम रेट पर ठेका लेकर एजेंसी फंसी, मरीजों को नुकसान
108 एंबुलेंस सेवा के संचालन का ठेका सम्मान फाउंडेशन को मिला था। संस्था ने काफी कम रेट पर एजेंसी का ठेका लिया। इस वजह से एबुलेंस की देखरेख सही तरीके से नहीं हो सकी। इसका नतीजा हुआ कि जो एंबुलेंस खराब हो रहे थे, उनकी मरम्मत नहीं हो पाई। एंबुलेंस को सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। सही से एंबुलेंस संचालन नहीं कर पाने के कारण सम्मान फाउंडेशन का करार भी खत्म कर दिया है। नई एजेंसी के चयन तक ही पुरानी रहेगी, इसका भी असर
राज्य में 108 एंबुलेंस सर्विस के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए टेंडर निकाला गया है। जबकि, सम्मान फाउंडेशन को दो माह पहले ही हटाया जा चुका है। लेकिन, जब तक नई एजेंसी का चयन नहीं होता है, सम्मान फाउंडेशन को ही एंबुलेंस का ऑपरेशन और मेंटनेंस करना है। लेकिन वर्तमान एजेंसी इसमें रुचि नहीं ले रही है। अब 237 नई एंबुलेंस खरीदी जा रही, आने का है इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 237 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस खरीदने के लिए टेंडर जारी किया गया है। नए एंबुलेंस की खरीदारी पर 100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने की संभावना है। क्योंकि, एक एंबुलेंस की कीमत करीब 40 लाख से अधिक होने की संभावना है। नई एंबुलेंस आने के बाद ही मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचने की उम्मीद है। कुछ महीने में बेहतर हो जाएगी व्यवस्था
जल्द व्यवस्था बदलेगी। नई एंबुलेंस की खरीद जल्द हो जाएगी। पुरानी एजेंसी को हटा दिया गया है, नई एजेंसी का चयन जल्द कर उसे संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। आने वाले कुछ महीनों में 108 एंबुलेंस सेवा बेहतर हो जाएगी।-डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री।
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