Last Updated:
Bihar Teacher Recruitment: बिहार विधानसभा में मंगलवार को शिक्षा विभाग में खाली पदों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा. उच्च शिक्षा विभाग में 85 प्रतिशत पद रिक्त होने और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में 62 प्रतिशत शिक्षकों की कमी को लेकर सत्ता पक्ष के विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा. जब मामला बढ़ गया तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दखल देना पड़ा और उन्होंने इसको लेकर बड़ा ऐलान किया.
विधानसभा में गूंजा शिक्षकों की कमी का मुद्दा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा- 1 महीने में भरेंगे खाली पद
पटना. बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य में शिक्षकों और उच्च शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा. सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर रिक्तियों का सवाल उठाया. इस विषय पर बहस के दौरान जब सदन में गतिरोध बढ़ने लगा तो खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कमान संभाली. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग को विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं और एक महीने के भीतर इन सभी पदों पर बहाली प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
शालिनी मिश्रा ने उठाया उच्च शिक्षा में 85% खाली पदों का मुद्दा
बता दें कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान जेडीयू विधायक शालिनी मिश्रा ने ध्यानाकर्षण के जरिए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग में मैनपावर की भारी कमी का मामला सामने रखा. उन्होंने सदन को बताया कि विभाग में लगभग 85 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे हैं, जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक व शैक्षणिक कार्यों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है. इस सवाल का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने माना कि पद खाली हैं, लेकिन सरकार इसे लेकर गंभीर है और जल्द ही इन सभी रिक्त पदों को भरने के लिए नई बहाली प्रक्रिया की शुरुआत की जाएगी.
62 प्रतिशत शिक्षकों की कमी पर भड़के जेडीयू विधायक श्याम रजक
सदन में दूसरा बड़ा सवाल जेडीयू विधायक श्याम रजक ने उठाया. उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों की बदहाली का मुद्दा उठाया. श्याम रजक ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन आवासीय विद्यालयों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 62 प्रतिशत शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे गरीब और वंचित तबके के बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है. इस पर विभागीय मंत्री लखींद्र पासवान ने जवाब दिया कि बिहार लोक सेवा आयोग को नए शिक्षकों की बहाली के लिए अधियाचना भेजी जा चुकी है.
समय सीमा की मांग पर अड़े विधायक, मंत्री के जवाब से असंतोष
मंत्री लखींद्र पासवान के इस पारंपरिक जवाब पर विधायक श्याम रजक ने असंतोष जताया और नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने सरकार से पूछा कि सिर्फ अधियाचना भेजने से काम नहीं चलेगा, सरकार यह स्पष्ट करे कि इन स्कूलों को नए शिक्षक कब तक मिल जाएंगे. श्याम रजक ने बहाली प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा बताने की मांग की. इस पर मंत्री लखींद्र पासवान ने दोबारा कहा कि सरकार की मंशा साफ है और वे खुद चाहते हैं कि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति धरातल पर उतरे.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बड़ी घोषणा, एक महीने का दिया अल्टीमेटम
वहीं, इस मुद्दे पर जब सदन में विधायकों की नाराजगी और बहस बढ़ती दिखी, तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद हस्तक्षेप किया. मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों के महत्व को रेखांकित करते हुए बड़ा आश्वासन दिया. उन्होंने सदन के पटल पर घोषणा की, “मैं शिक्षा विभाग को इस पूरी प्रक्रिया की विशेष मॉनिटरिंग करने का कड़ा निर्देश देता हूं. सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ठीक एक महीने के अंदर इन विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली सुनिश्चित कर ली जाएगी.” मुख्यमंत्री के इस भरोसे के बाद सदन का माहौल शांत हुआ और बेरोजगार युवाओं में नौकरी की नई उम्मीद जगी है.
About the Author
पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें