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झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर मंगलवार को सीआईडी और रांची पुलिस ने जेपीएससी ऑफिस सहित आठ जगह छापेमारी की। टीम ने परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. (टीडीपीएल) के ठिकानों को भी खंगाला। फिर जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और डेटा एंट्री, प्राेग्रामिंग व परीक्षा मैनेजमेंट से जुड़े आठ लोगों को हिरासत में ले लिया गया। टीडीपीएल के ऑफिस को भी सील कर दिया गया। इसी बीच देर शाम जेपीएससी के चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। छापेमारी की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पूरे मामले की माॅनिटरिंग कर रहे हैं। सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में मंगलवार दोहपर पहुंची टीम ने जेपीएससी कार्यालय को देर रात तक खंगाला। टीडीपीएल से जुड़े दस्तावेजों और कंप्यूटरों की भी गहनता से जांच की। इन्हें जब्त कर लिया। इसी बीच राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है। पुलिस और सीआईडी की टीम ने अब जब्त दस्तावेजों और कंप्यूटरों की जांच में डिजिटल फॉरेंसिक टीम को लगाया है। पहले श्वेता के घर की तलाशी, फिर हिरासत में लिया
सीआईडी की टीम ने सबसे पहले जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ की। फिर उन्हें लेकर वर्धमान कंपाउंड स्थित उनके घर पर गई। वहां तलाशी लेने के बाद टीम फिर श्वेता को लेकर जेपीएससी ऑफिस पहुंची और दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस छापेमारी के दौरान पूरे जेपीएससी कार्यालय की पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। किसी को बाहर जाने नहीं दिया गया। इनके खिलाफ चल रही जांच
परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड
मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी (मार्केटिंग मैनेजर, टीडीपीएल)
सत्यपाल सिंह (निदेशक, टीडीपीएल)
रामबीर सिंह (निदेशक, टीडीपीएस)
प्रोग्रामर एवं लोकसेवक (जेपीएससी) इन बिंदुओं पर जांच कर रही है सीआईडी
डिजिटल टैंपरिंग और ओएमआर में फेरबदल: क्या परीक्षा के बाद सर्वर या ओएमआर शीट में बैकडेट में बदलाव किए गए?
मनी लॉन्ड्रिंग का कोण: अभ्यर्थियों से वसूली गई मोटी रकम किन-किन खातों में भेजी
अधिकारियों की भूमिका: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को जेपीएससी ने किस आधार पर परीक्षा संचालन की अनुमति दी। जानिए…कैसे बढ़ता गया विवाद
20 जून 2026: सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। आयोग के दो सदस्यों ने परीक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
2 जुलाई 2026: 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। आयोग के तीनों सदस्यों ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इससे विवाद और गहरा गया।
रिजल्ट के साथ कटऑफ अंक सार्वजनिक न करने पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई।
अब परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी के यूपी में ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी सामने आने के बाद छापेमारी की यह कार्रवाई की गई। बड़े सवाल… जो गड़बड़ियों का इशारा कर रहे
1. पूरी परीक्षा प्रक्रिया एक निजी एजेंसी के हवाले करना निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप है?
2. जब आवेदन, प्रश्नपत्र, ओएमआर, स्कैनिंग, स्क्रीन मार्किंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग तक एक ही एजेंसी के पास है,तो गड़बड़ी कैसे पकड़ी जाएगी?
3. एजेंसी यूपी में ब्लैकलिस्टेड थी। क्या एजेंसी के चयन से पहले उसके पूर्व रिकॉर्ड, विवादों का सत्यापन किया गया था?
4. पहले अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से सुरक्षा व गोपनीयता सुनिश्चित की जाती थी, तो अब व्यवस्था क्यों बदली गई। सीएम से मिले जयराम… कहा-सीबीआई जांच कराएं और मुख्य परीक्षा स्थगित करें
जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के रिजल्ट पर छिड़े विवाद के बीच जेएलकेएम विधायक जयराम महतो मंगलवार को सीएम हेमंत सोरेन से मिले। पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने और 25 जुलाई से होने वाली मुख्य परीक्षा को तत्काल स्थगित करने की मांग की। सीएम को दिए ज्ञापन में जयराम ने कहा है कि परंपरा के विपरीत आयोग ने इस बार पीटी के रिजल्ट के साथ श्रेणीवार कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किया। रिजल्ट के बाद मुख्य परीक्षा के लिए सिर्फ 22 दिन का समय दिया गया, जो परंपरा के विपरीत है।
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