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F-35, Su-57 अपने पास रख ले रूस-अमेरिका, देसी राफेल पर आ गई...


भारत लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के उन्नत लड़ाकू विमानों (5th Gen Fighter Jets) की कमी का हल निकालने में जुटा हुआ है. अमेरिका जहां अपने F-35 फाइटर जेट्स भारत को बेचने के लिए पूरा जोर लगा रहा है, तो वहीं रूस Su-57 लड़ाकू विमानों के लिए ऑफर पर ऑफर दिए जा रहा है. हालांकि इस बीच भारत के अपने ‘देसी राफेल’ तेजस Mk2 को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जिससे इन 5th जेन फाइटर जेट्स की कमी का हल निकल सकता है. दरअसल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संकेत दिया है कि देश के सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम ने रफ्तार पकड़ ली है. तेजस Mk2 के पहले प्रोटोटाइप की असेंबली तेजी से आगे बढ़ रही है और 2027 में यह पहली बार आसमान में उड़ान भर सकता है.

फ्रांस के फार्नबरो इंटरनेशनल एयरशो 2026 के दौरान HAL प्रमुख ने कहा कि परियोजना तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रही है. पहले प्रोटोटाइप की उड़ान भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी.

तेजस Mk2 क्यों है खास?

तेजस Mk2 सिर्फ तेजस Mk1A का अपग्रेड वर्जन नहीं है, बल्कि इसे एक पूरी तरह नए और ज्यादा शक्तिशाली लड़ाकू विमान के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह विमान मौजूदा तेजस सीरीज और भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के बीच की कमी को पूरा करेगा.

तेजस Mk2 में ज्यादा लंबा एयरफ्रेम, ज्यादा ईंधन क्षमता, अधिक हथियार ले जाने की क्षमता और पहले से ज्यादा ताकतवर इंजन लगाया जाएगा. विमान में अमेरिका की जीई एयरोस्पेस F414-INS6 इंजन लगाया जाएगा, जो करीब 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करेगा.

इस इंजन की ताकत से तेजस Mk2 ज्यादा वजन के हथियारों के साथ लंबी दूरी तक मिशन को अंजाम देने में सक्षम होगा.

तेजस फाइटर जेट को अत्‍याधुनिक वेपन सिस्‍टम से लैस करने की तैयारी चल रही है. (फाइल फोटो)

नई तकनीक से लैस देसी फाइटर

तेजस Mk2 में कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया जा रहा है. इसमें भारत का स्वदेशी उत्तम AESA रडार लगाया जाएगा, जो दुश्मन के विमानों को दूर से पहचानने, कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होगा.

इसके अलावा विमान में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सेंसर फ्यूजन तकनीक, सुरक्षित डेटा लिंक और भविष्य में अपग्रेड किए जा सकने वाले मिशन कंप्यूटर शामिल होंगे. विमान के डिजाइन में कैनार्ड विंग्स भी शामिल किए गए हैं, जो इसकी गतिशीलता और हवा में नियंत्रण क्षमता को बेहतर बनाएंगे.

दुश्मन पर भारी पड़ेंगे हथियार

तेजस Mk2 को मल्टी-रोल फाइटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसमें हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र Mk-1 और Mk-2 मिसाइल, प्रिसिजन गाइडेड बम, एंटी-रेडिएशन मिसाइल और अन्य अत्याधुनिक हथियार लगाए जा सकेंगे.

विमान में 11 हार्डपॉइंट होंगे, जिससे यह ज्यादा हथियार और ईंधन लेकर उड़ान भर सकेगा. इसे एयर सुपीरियरिटी, ग्राउंड अटैक, समुद्री हमले और दुश्मन की एयर डिफेंस को नष्ट करने जैसे अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है.

एयरफोर्स के लिए क्यों अहम है तेजस Mk2?

भारतीय वायुसेना लंबे समय से पुराने लड़ाकू विमानों के बेड़े को बदलने की योजना पर काम कर रही है. तेजस Mk2 भविष्य में मिराज-2000, जगुआर और मिग-29 जैसे विमानों की जगह लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत को लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी कंपनियों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी.

AMCA के लिए भी बनेगा रास्ता

तेजस Mk2 को भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर AMCA की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. इस विमान में विकसित होने वाली एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और फ्लाइट कंट्रोल तकनीकें भविष्य में AMCA कार्यक्रम में भी उपयोगी साबित होंगी.

एचएएल के अनुसार, पहले प्रोटोटाइप की असेंबली पूरी होने के बाद ग्राउंड टेस्टिंग, सिस्टम जांच और उड़ान परीक्षण शुरू होंगे. इसके बाद कई प्रोटोटाइप के जरिए विमान की क्षमता और प्रदर्शन को परखा जाएगा.

तेजस Mk2 की पहली उड़ान भारत के लिए सिर्फ एक नए विमान का आगमन नहीं होगी, बल्कि यह स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण की दिशा में एक बड़ी छलांग होगी.



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