भास्कर न्यूज | गिरिडीह जिले के करीब 175 थैलेसीमिया मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। सदर अस्पताल में फेरिटिन जांच की सुविधा बंद होने से उन्हें मजबूरन निजी पैथोलॉजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इस टेस्ट के लिए करीब 600 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च भारी पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, थैलेसीमिया मरीजों को बार-बार खून चढ़ाने के बाद हर तीन महीने में फेरिटिन जांच कराना जरूरी होता है। इससे शरीर में आयरन की मात्रा और बीमारी की स्थिति की सही जानकारी मिलती है। पहले सदर अस्पताल के एसआरएल (SRL) जांच घर में यह सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और एसआरएल के बीच करार (एमओयू) समाप्त होने के बाद यह जांच बंद हो गई। सदर अस्पताल के अपने पैथोलॉजी लैब में भी फिलहाल यह सुविधा नहीं है। हालांकि मरीजों के केएफटी (किडनी) और एलएफटी (लिवर) टेस्ट सदर अस्पताल में हो रहे हैं। जांच में देरी होने से लिवर और हृदय को पहुंच सकता है गंभीर खतरा थैलेसीमिया मरीजों में बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन से शरीर में अतिरिक्त आयरन जमा हो जाता है। फेरिटिन जांच से ही डॉक्टर आयरन की स्थिति देखकर इलाज और दवा की खुराक तय करते हैं। समय पर जांच न होने से शरीर में बढ़ रहे आयरन का पता नहीं चलता है, जिससे लिवर, हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यह जांच समय पर कराना बहुत जरूरी है। जांच जल्द शुरू होगी : डीएस सदर अस्पताल के डीएस डॉ. प्रदीप बैठा ने बताया कि एसआरएल के बंद होने से परेशानी बढ़ी है, लेकिन फेरिटिन जांच की व्यवस्था जल्द शुरू होगी। इसकी तैयारी की जा रही है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी नहीं उठानी पड़े। इसके लिए प्रबंधन गंभीर है।
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