Last Updated:
Deoghar Farmer Success Story: देवघर के किसान अंबिका कुशवाहा के खेतों में पहले केवल पारंपरिक फसलें उगती थीं जिनसे घर तो चल जाता था पर आर्थिक तंगी बनी रहती थी. उन्होंने कुछ नया करने के लिहाज से एक एकड़ में भिंडी बोयी और अब उनकी आमदनी में बढ़िया इजाफा हुआ है.
देवघर. जहां कभी इस खेत से सिर्फ घर का गुजारा होता था, आज वहीं खेत किसान के लिए कमाई की ऐसी मशीन बन गया है कि हर दूसरे-तीसरे दिन जेब में नगद पैसा आ रहा है. जिस जमीन पर पहले धान और गेहूं की पारंपरिक खेती होती थी, उसी एक एकड़ खेत में अब भिंडी की लहलहाती फसल किसान की तकदीर बदल रही है. खेती का तरीका बदला, सोच बदली और नतीजा यह हुआ कि लागत से करीब 10 गुना तक मुनाफा मिलने लगा. यह कहानी है देवघर प्रखंड के गोपीडीह गांव के प्रगतिशील किसान अंबिका कुशवाहा की, जिन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर सब्जी उत्पादन का रास्ता चुना और आज दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं.
क्या कहते हैं किसान अंबिका कुशवाहा
लोकल 18 से बातचीत करते हुए किसान अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि उनके पिता वर्षों तक इसी खेत में धान और गेहूं की खेती किया करते थे. फसल तो होती थी, लेकिन उससे केवल परिवार का किसी तरह खर्च निकल पाता था. खेती में मेहनत बहुत लगती थी, लेकिन आमदनी इतनी नहीं होती थी कि आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके. समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि अगर खेती से बेहतर कमाई करनी है, तो फसल बदलनी होगी. इसके बाद उन्होंने एक एकड़ जमीन में भिंडी की खेती करने का फैसला लिया और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा बदलाव साबित हुआ.
हर तुड़ाई के साथ आता है नगद पैसा
अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि भिंडी की खेती में शुरुआत में मेहनत जरूर करनी पड़ती है, लेकिन एक बार फसल तैयार हो जाने के बाद लगातार करीब तीन महीने तक तुड़ाई होती रहती है. सबसे बड़ी बात यह है कि हर तुड़ाई के साथ किसान के हाथ में नगद पैसा आता है. यानी फसल बेचने के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता. बाजार में जैसे-जैसे भिंडी की मांग रहती है, वैसे-वैसे नियमित कमाई भी होती रहती है. यही वजह है कि सब्जी की खेती पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हो रही है.
अभी तक डेढ़ लाख तक की कमाई हो चुकी है
किसान का कहना है कि जिस खेत से पहले कोई खास आमदनी नहीं होती थी, उसी खेत ने आज उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी है. सिर्फ खेती का तरीका बदलने और नई सोच अपनाने का परिणाम है कि अब तक वह करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर चुके हैं. उनका मानना है कि अगर किसान बाजार की मांग को समझकर खेती करें और समय-समय पर नई तकनीक अपनाएं, तो कम जमीन में भी अच्छी आय हासिल की जा सकती है.
देवघर में सब्जियों की रहती है सालभर डिमांड
अंबिका कुशवाहा यह भी बताते हैं कि देवघर धार्मिक और पर्यटन नगरी है. बाबा बैद्यनाथ धाम में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. इसके कारण यहां के होटल, धर्मशाला, लॉज और रेस्टोरेंट में ताजी सब्जियों की मांग हमेशा बनी रहती है. यही वजह है कि यहां सब्जी बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती और किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम भी मिल जाता है. स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के व्यापारियों से भी उन्हें नियमित ऑर्डर मिलते रहते हैं.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …
और पढ़ें