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पेपर लीक पर पूर्व DGP विक्रम सिंह के 3 धांसू सुझाव, जड़ से खत्म होगा ये कैंसर

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How to Stop NEET Paper Leak: पूर्व डीजीपी और एनआईए यूनिवर्सिटी के चांसलर विक्रम सिंह ने पेपर लीक माफिया को खत्म करने के लिए सख्त दंडात्मक कार्रवाई का सुझाव दिया. उन्होंने दोषियों को 15-20 साल की जेल, संपत्ति जब्ती और फास्ट ट्रैक कोर्ट में 45 दिनों के भीतर सजा देने की वकालत की. इसके साथ ही बच्‍चों के जान देन पर उकसाने का केस दर्ज करने और फर्जीवाड़ा करने वाले कोचिंग संस्थानों पर केस चलाकर आजीवन बैन लगाने की मांग की.

पेपर लीक पर पूर्व DGP विक्रम सिंह के 3 धांसू सुझाव, जड़ से खत्म होगा ये कैंसरZoom

पेपर लीक पर विक्रम सिंह ने अहम सुझाव दिए.

नई दिल्ली. देश भर में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जीवाड़े को लेकर बने अशांत माहौल के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और एनआईए यूनिवर्सिटी के चांसलर विक्रम सिंह ने News18 के शोर गूंज में कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने शिक्षा तंत्र में फैले इस कैंसर को उखाड़ फेंकने के लिए प्रशासनिक, कानूनी और दंडात्मक सुधारों का एक ठोस खाका पेश किया. विक्रम सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक पेपर लीक माफिया और भ्रष्ट तत्वों पर मिसाली और भय पैदा करने वाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह लगाम लगाना नामुमकिन है.

सुसाइड के मामलों में दर्ज हो एबेटमेंट का केस
न्यूज18 से बातचीत में विक्रम सिंह ने बेहद भावुक और गंभीर लहजे में कहा कि पेपर लीक और धांधली के तनाव में आकर अगर 24 बच्चों ने अपनी जान दी है तो यह एक बड़ी मानवीय त्रासदी है. उन्होंने मांग की कि यदि किसी बच्चे ने सुसाइड नोट या संकेत में पेपर लीक को अपनी आत्महत्या की वजह बताया है तो कानून के मुताबिक इसमें एबेटमेंट टू कमिट सुसाइड (आत्महत्या के लिए उकसाने) की धारा के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए.

100 दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई से थर्राएगा माफिया
पूर्व IPS अधिकारी ने कड़े दंडात्मक प्रावधानों पर जोर देते हुए कहा कि बिना दंड के राज्य अधिकार नहीं चलता. उन्होंने सुझाव दिए:
• 20 साल की सजा और संपत्ति कुर्क: पेपर लीक में शामिल मास्टरमाइंड, कोचिंग संचालकों और भ्रष्ट अधिकारियों को कम से कम 15 से 20 साल की जेल होनी चाहिए.
• संपत्ति जब्ती: आरोपियों की चल और अचल संपत्ति को तुरंत कुर्क किया जाना चाहिए.
• 100 लोगों पर नजीर पेश हो: यदि देश भर में ऐसे 100 प्रमुख दोषियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए 45 दिनों के भीतर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर दी जाए तो रिश्वत देकर पेपर हासिल करने या मुन्नाभाई बनने की हिम्मत कोई नहीं करेगा.



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