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बरसात के मौसम में खेतों में लंबे समय तक जलभराव रहने से गन्ने की फसल की बढ़वार रुक सकती है और विल्ट जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते खेतों से पानी की निकासी और नियमित निगरानी से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.
शाहजहांपुर: बरसात के मौसम में खेतों में लगातार होने वाले जलभराव से गन्ने की फसल को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. खेतों में पानी रुकने से गन्ने की जड़ों का विकास रुक जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसके परिणामस्वरूप गन्ने की बढ़त थम जाती है और पत्तियों में पीलापन आने लगता है. इतना ही नहीं, लंबे समय तक जल भराव रहने से विल्ट जैसी घातक बीमारियों और कीटों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ता है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने और फसल को बीमारियों से बचाने के लिए त्वरित उपाय अपनाने की सलाह दी है.
गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि खेतों में 2 से 4 दिनों तक जलभराव रहने पर गन्ने की जड़ों द्वारा पोषक तत्व और जल अवशोषण की प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो जाती है. जब पानी लंबे समय तक खड़ा रहता है, तो पत्तियों में पीलापन आने लगता है और फसल की बढ़त रुक जाती है. इस समय गन्ना प्रति सप्ताह लगभग 5 इंच की दर से बढ़ता है, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह ग्रोथ थम जाती है. जलभराव से विल्ट जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. इसलिए, आगे संभव हो तो किसानों को तुरंत खेतों से जल निकासी का प्रबंध करना चाहिए ताकि फसल का विकास निरंतर बना रहे.
गन्ने की जड़ों पर जलभराव का असर
गन्ने की फसल की बेहतर ग्रोथ के लिए जड़ों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है. जड़ों का मुख्य काम मिट्टी से पोषक तत्व और जल अवशोषित कर ज़ाइलम और फ्लोएम नलिकाओं के माध्यम से पत्तियों तक पहुंचाना होता है. जब खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहता है, तो यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित हो जाती है. पोषक तत्वों की आपूर्ति रुकने से पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं और गन्ने की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है.
जल निकासी की चुनौती और समाधान
बरसात के दिनों में जब चारों तरफ खेतों में पानी भर जाता है, तो जल निकासी करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. अगर आसपास के अन्य खेतों में भी जलभराव हो, तो पानी बाहर निकालना कठिन होता है. हालांकि, जहां भी जल निकासी की गुंजाइश या व्यवस्था उपलब्ध हो, वहां से तुरंत पानी बाहर निकाल देना चाहिए. खेत से पानी निकलने पर ही गन्ने की फसल को सुचारू रूप से बढ़ने का माहौल मिल पाता है.
बीमारियों और कीटों का बढ़ता प्रकोप
लगातार जलभराव रहने से खेतों में नमी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है. ऐसी स्थिति में गन्ने में विल्ट यानी उकठा जैसी घातक फंगस जनित बीमारियों और विभिन्न कीटों का हमला शुरू हो जाता है. अगर समय रहते जल निकासी और उचित उपचार न किया जाए, तो गन्ने की फसल सूखने लगती है और किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
गन्ने की बढ़वार और किसानों के लिए सलाह
मानसूनी मौसम गन्ने की बढ़वार के लिए बेहतर समय माना जाता है. इस दौरान अनुकूल परिस्थितियों में गन्ना प्रति सप्ताह लगभग 5 इंच की गति से बढ़ता है. लेकिन जलभराव जैसी प्रतिकूल परिस्थितियां इस तेज ग्रोथ को पूरी तरह रोक देती हैं. ऐसे में एक्सपर्ट ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों की नियमित निगरानी करें और जल निकासी के साथ-साथ बताए गए सभी जरूरी उपाय करें ताकि फसल की निरंतर ग्रोथ बनी रहे.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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