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Chaturmas Food Rules: चातुर्मास के चार महीनों में क्या खाएं, क्या नहीं?...


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चातुर्मास क्या खाएं, क्या नहीं? सावन से कार्तिक तक के नियम और धार्मिक महत्व

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Chaturmas Food Rules: चातुर्मास के पवित्र चार महीने शुरू हो गए हैं, जो सावन से कार्तिक माह तक चलेंगे. इन महीनों में धार्मिक नियमों का पालन करते हुए खान-पान का विशेष ध्यान रखा जाता है. क्या आप जानते हैं कि इन चार महीनों में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? आइए जानते हैं चातुर्मास के दौरान भोजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम और उनका धार्मिक महत्व, ताकि आप इन पवित्र दिनों का पूरा लाभ उठा सकें.

चातुर्मास क्या खाएं, क्या नहीं? सावन से कार्तिक तक के नियम और धार्मिक महत्वZoom

Chaturmas Food Rules: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से इसकी शुरुआत होती है और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर इसका समापन होता है. इन चार महीनों में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं. इस अवधि में साधना, व्रत, दान, जप, तप और सात्विक जीवन अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में खान-पान और दिनचर्या पर संयम रखने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है.

119 दिन का चातुर्मास
साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से हो चुकी है और 20 नवंबर को इसका समापन होगा. इस तरह चार मास का चातुर्मास लगभग 119 दिन तक चलने वाला है. इन चार माह भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं. इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं. भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद शुभ व मांगलिक कार्यक्रम रूक जाते हैं. चातुर्मास के चार महीनों में वातावरण में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिसका असर हमारी सेहत पर पड़ता है. इसलिए पुराणों में इस दौरान खान-पान में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या ना हो.

चातुर्मास मास में क्या खाना चाहिए?

  • सावन मास (पहला महीना): हरी पत्तेदार सब्जियों (जैसे पालक, साग) का त्याग करें.
  • भाद्रपद मास (दूसरा महीना): दही और दही से बने मुख्य पदार्थ जैसे छाछ, कढ़ी या लस्सी का सेवन वर्जित माना गया है.
  • आश्विन मास (तीसरा महीना): दूध या दूध से बने मुख्य व्यंजनों का सेवन छोड़ना उत्तम माना जाता है.
  • कार्तिक मास (चौथा महीना): उड़द की दाल और बैंगन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.

चार महीनों में क्या नहीं खाना चाहिए?

  • सावन मास: इस महीने हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, बथुआ और सरसों का साग खाने से परहेज करने की परंपरा है. वर्षा ऋतु में इनमें कीटाणु और सूक्ष्म जीव बढ़ने की संभावना अधिक रहती है.
  • भाद्रपद मास: इस महीने दही का सेवन ना करने की मान्यता है. आयुर्वेद के अनुसार बरसात के मौसम में दही पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है.
  • आश्विन मास: आश्विन में दूध का त्याग करने की परंपरा बताई गई है. हालांकि आवश्यकता होने पर दूध से बने अन्य सात्विक विकल्पों का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है.
  • कार्तिक मास: कार्तिक में उड़द की दाल और अधिक तैलीय भोजन से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान सात्विक और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता दी जाती है.

चातुर्मास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं. इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते. दूसरी ओर, जप, तप, पूजा, कथा-श्रवण, दान, तीर्थ सेवा और भगवान विष्णु एवं शिव की आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है. संत-महात्मा भी इस समय एक स्थान पर रहकर धर्मोपदेश और साधना करते हैं. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, चातुर्मास केवल धार्मिक नियमों का पालन करने का समय नहीं है, बल्कि यह संयम, अनुशासन, सात्विक आहार और आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन को संतुलित बनाने का भी संदेश देता है. श्रद्धा और नियमपूर्वक इन चार महीनों का पालन करने से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है.

About the Author

Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…

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