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Birsa Zoo Ranchi News:भगवान बिरसा जैविक उद्यान से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद सुखद खबर सामने आई है. बिरसा जू के इतिहास में पहली बार पूरी तरह से वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए स्पेक्टेकल्ड कोबरा यानी नाग सांप के 5 अंडों की सफल हैचिंग कराई गई है. इसके साथ ही जू में सैंड बोआ के 8 स्वस्थ शिशुओं का भी जन्म हुआ है. इस दोहरी सफलता से जू प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में भारी उत्साह है.
रांची के बिरसा जू में पहली बार कृत्रिम ऊष्मायन से निकले 5 नाग सांप के बच्चे
रांची. झारखंड की राजधानी रांची के भगवान बिरसा जैविक उद्यान में सरीसृप संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है. जू के इतिहास में पहली बार नाग सांप (Spectacled Cobra) के अंडों का कृत्रिम ऊष्मायन (Artificial incubation) कर पांच स्वस्थ बच्चों को सफलतापूर्वक अंडों से बाहर निकाला गया है. करीब 70 दिनों तक नियंत्रित तापमान और आर्द्रता में वैज्ञानिक तरीके से अंडों का ऊष्मायन किया गया. इसी क्रम में सैंड बोआ के आठ स्वस्थ शिशुओं का भी जन्म हुआ है.
पहली बार Artificial incubation से नाग सांप के बच्चे
रांची के ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान में पहली बार नाग सांप यानी Spectacled Cobra के अंडों का कृत्रिम ऊष्मायन सफल रहा है. जू की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, करीब 70 दिनों तक वैज्ञानिक विधि से नियंत्रित तापमान और आर्द्रता में अंडों को रखा गया. इसके बाद पांच स्वस्थ नाग सांप के शिशु सफलतापूर्वक अंडों से बाहर निकले. बिरसा जू की आधिकारिक जानकारी में नाग सांप यानी स्पेक्टेकल्ड कोबरा (Spectacled Cobra) का वैज्ञानिक नाम Naja naja और सामान्य ऊष्मायन अवधि 48 से 69 दिन बताई गई है, इसलिए करीब 70 दिनों की प्रक्रिया इस अवधि के अनुरूप है.
बिरसा जू के इतिहास में पहली ऐसी सफलता
जू प्रबंधन के मुताबिक, यह बिरसा जैविक उद्यान के इतिहास में पहली बार है जब नाग सांप के अंडों का कृत्रिम उष्मायन (Artificial Incubation) के जरिए सफल हैचिंग कराया गया है. पूरी प्रक्रिया जू के जीव वैज्ञानिक सह हर्पेटोलॉजिस्ट विवेकानंद कुमार के मार्गदर्शन और देखरेख में वैज्ञानिक मानकों के अनुसार पूरी की गई. यह उपलब्धि सरीसृपों के वैज्ञानिक प्रजनन और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
सैंड बोआ के 8 शिशुओं का भी जन्म
इसी दौरान बिरसा जू में सैंड बोआ के आठ स्वस्थ शिशुओं का भी जन्म हुआ है. जू की आधिकारिक प्रजाति सूची में Red Sand Boa को Eryx johnii और Common Sand Boa को Eryx conicus के रूप में दर्ज किया गया है. बता दें कि सैंड बोआ गैर विषैला सांप है.
नवजात सर्पों की विशेष निगरानी
जू प्रबंधन के अनुसार, सभी नवजात सापों को फिलहाल विशेष निगरानी में रखा गया है. पशु चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश साहू और विशेषज्ञों की टीम उनके स्वास्थ्य, वृद्धि और व्यवहार की नियमित वैज्ञानिक जांच कर रही है. नवजात सांपों की शुरुआती अवस्था में विशेष देखभाल और निगरानी उनके सुरक्षित विकास के लिए महत्वपूर्ण है.
संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन को मिलेगी मजबूती
बता दें कि भगवान बिरसा जैविक उद्यान करीब 104 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. झारखंड वन विभाग के अनुसार, जू का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ संरक्षण प्रजनन, जैव विविधता और वन्यजीव शिक्षा को बढ़ावा देना है. नाग सांप के कृत्रिम ऊष्मायन की यह सफलता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. जू प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रम भविष्य में सरीसृप संरक्षण, शोध और प्रजातियों के प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकते हैं.