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विपिन शुक्ला, जो विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री भी हैं, बताते हैं कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा विश्व हिंदू परिषद से मिली. पहले वह साल में एक बार हुतात्मा दिवस पर ही रक्तदान किया करते थे. लेकिन एक दिन उनके एक मित्र का सड़क हादसा हो गया. उस समय उसे तुरंत खून की जरूरत थी और कोई रक्तदाता नहीं मिल रहा था. तभी उन्हें फोन आया और उन्होंने जाकर रक्तदान किया. उनका मित्र आज पूरी तरह स्वस्थ है. इस घटना ने उनके जीवन की सोच बदल दी और तभी से उन्होंने नियमित रूप से हर तीन महीने में रक्तदान करने का फैसला किया.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले विपिन शुक्ला इंसानियत की एक मिसाल बन गए हैं. उन्होंने 25वीं बार स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों की मदद की है. उनके इस नेक कार्य की जिले में काफी सराहना हो रही है.उनका कहना है कि रक्तदान किसी जरूरतमंद की जान बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है और हर स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत में विपिन शुक्ला ने बताया कि जब भी किसी मरीज को खून की जरूरत होती है और उनसे संपर्क किया जाता है, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान के लिए पहुंच जाते हैं. उनका मानना है कि रक्तदान से किसी की जिंदगी बच सकती है, इसलिए यह हर व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी भी है.
2019 से कर रहे रक्तदान
विपिन शुक्ला, जो विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री भी हैं, बताते हैं कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा विश्व हिंदू परिषद से मिली. पहले वह साल में एक बार हुतात्मा दिवस पर ही रक्तदान किया करते थे. लेकिन एक दिन उनके एक मित्र का सड़क हादसा हो गया. उस समय उसे तुरंत खून की जरूरत थी और कोई रक्तदाता नहीं मिल रहा था. तभी उन्हें फोन आया और उन्होंने जाकर रक्तदान किया. उनका मित्र आज पूरी तरह स्वस्थ है. इस घटना ने उनके जीवन की सोच बदल दी और तभी से उन्होंने नियमित रूप से हर तीन महीने में रक्तदान करने का फैसला किया. विपिन शुक्ला ने बताया कि उनके बड़े भाई दया प्रकाश शुक्ला भी वर्ष 2019 से लगातार रक्तदान कर रहे हैं. उन्हें देखकर भी काफी प्रेरणा मिली. विपिन कहते हैं कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है. यही सोच उन्हें लगातार रक्तदान के लिए प्रेरित करती है.
25 बार कर चुके रक्तदान
विपिन शुक्ला ने बताया कि वह वर्ष 2019 से नियमित रूप से हर तीसरे महीने रक्तदान कर रहे हैं और अब तक 25 बार रक्तदान कर चुके हैं. उनका कहना है कि रक्तदान करने के बाद उन्हें अच्छा महसूस होता है और इससे समाज की सेवा करने का संतोष भी मिलता है. युवाओं के लिए क्या है संदेश: युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है, तो उसे हर तीन महीने में रक्तदान जरूर करना चाहिए. रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाई जा सकती है. उनका मानना है कि समाज में अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मरीज को खून की कमी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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