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Paddy Farming Tips: धान की रोपाई के बाद 1 महीने तक करें...


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Paddy Farming Tips: देवघर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने किसानों को धान की रोपाई के बाद पहले एक महीने तक विशेष देखभाल करने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि इसी अवधि में पौधों में सबसे अधिक कल्ले निकलते हैं, जो आगे चलकर बालियों और बेहतर पैदावार का आधार बनते हैं. किसानों को रोपाई के 25 से 30 दिन बाद प्रति एकड़ 30 से 35 किलोग्राम यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग करनी चाहिए. उसके बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए.

देवघर: झारखंड में इन दिनों धान की रोपाई का काम लगभग पूरा होने की ओर है. कई इलाकों में रोपाई समाप्त हो चुकी है, जबकि कुछ जगहों पर किसान अंतिम चरण का काम कर रहे हैं. इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. देवघर जिले में भी बड़ी संख्या में किसान पटवन के सहारे धान की खेती कर रहे हैं. ऐसे में रोपाई के बाद का पहला एक महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही फसल की बढ़वार और उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती है.

रोपाई के बाद पहला महीना सबसे अहम
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि धान की रोपाई के बाद शुरुआती एक महीने तक पौधों की विशेष देखभाल करनी चाहिए. यही वह समय होता है, जब पौधों में सबसे अधिक कल्ले निकलते हैं. जितने अधिक कल्ले बनेंगे, उतनी अधिक बालियां आएंगी. इससे अंत में उपज भी बेहतर होगी. उन्होंने कहा कि किसान रोपाई के बाद खेत को भगवान भरोसे छोड़ने की गलती बिल्कुल न करें.

समय पर करें यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग
डॉ. ओझा ने बताया कि रोपाई के 25 से 30 दिन बाद यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग जरूर करनी चाहिए. प्रति एकड़ लगभग 30 से 35 किलोग्राम यूरिया डालना लाभदायक माना जाता है. यूरिया डालने के बाद खेत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इससे खाद अच्छी तरह घुलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचती है. इसका फायदा यह होता है कि पौधों की बढ़वार तेज होती है. खेत में हरियाली बनी रहती है. साथ ही अच्छी बालियां आने की संभावना भी बढ़ जाती है.

निराई-गुड़ाई और जिंक सल्फेट का रखें ध्यान
उन्होंने कहा कि खेत की समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना भी बेहद जरूरी है. खेत में उगने वाले खरपतवार धान के पौधों का पोषण और पानी दोनों छीन लेते हैं. यदि समय रहते खरपतवार हटा दिए जाएं, तो पौधों को पर्याप्त खाद, पानी और धूप मिलती है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और उनकी बढ़वार बेहतर होती है. डॉ. ओझा ने बताया कि यदि खेत में जिंक की कमी दिखाई दे रही हो, तो जिंक सल्फेट का प्रयोग करना चाहिए. इससे पौधों का विकास अच्छा होता है. पोषक तत्वों की कमी दूर होती है. जिन खेतों में जिंक की कमी होती है, वहां पौधे कमजोर रह जाते हैं और उत्पादन भी कम हो सकता है.

खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि खेत में लगातार 2 से 3 सेंटीमीटर तक पानी की हल्की परत बनी रहनी चाहिए. खेत को पूरी तरह सूखने नहीं देना चाहिए. वहीं जरूरत से ज्यादा पानी भी नहीं भरना चाहिए. संतुलित मात्रा में पानी मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं. पौधों की बढ़वार तेज होती है. अधिक कल्ले निकलते हैं. यही कल्ले आगे चलकर बालियों में बदलते हैं और अच्छी पैदावार का आधार बनते हैं. डॉ. राजन ओझा का कहना है कि यदि किसान रोपाई के बाद पहले एक महीने तक खाद, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही प्रबंधन करें, तो धान की फसल स्वस्थ रहेगी. इससे उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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