Last Updated:
Madras High Court Karur Stampede Verdict: मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया गया था. टीवीके प्रमुख विजय की रैली में हुई इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी. अदालत ने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन करता है तथा इससे भविष्य में ऐसी अनुचित मांगों की गलत परंपरा शुरू होगी.
विजय को हाईकोर्ट से झटका लगा.
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेत्री कषगम (TVK) सरकार के उस फैसले को पूरी तरह से रद्द कर दिया जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया था. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का यह कदम सार्वजनिक रोजगार से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है. यह मामला पिछले साल 27 सितंबर को टीवीके प्रमुख और अभिनेता (विजय) की रैली के दौरान हुए करूर हादसे से जुड़ा है. इस दुखद भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अनुकंपा नियुक्ति की घोषणा की थी.
‘अगर मनमानी की छूट दी तो अराजकता फैलेगी’
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की टीवीके (TVK) सरकार को झटका देते हुए स्पष्ट कहा कि कार्यपालिका की शक्ति संवैधानिक दायरे में ही रहनी चाहिए. कोर्ट ने टिप्पणी की, “यदि कार्यपालिका के फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं रहा और उन्हें खुली छूट दे दी गई तो चारों तरफ अराजकता का राज होगा.”
सार्वजनिक रोजगार के सिद्धांतों पर जोर देते हुए पीठ ने कहा कि सरकारी नौकरी राज्य द्वारा ऐसे ही किसी को बांटी नहीं जा सकती. इसे योग्यता से हासिल किया जाना चाहिए, इसके महत्व और मूल्य को समझा जाना चाहिए. रोजगार की आस में लाखों लोग कतार में इंतजार कर रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने अस्थायी आधार पर और न्यायिक समीक्षा के अधीन रहते हुए अनुकंपा नियुक्तियों के आदेश जारी करने की अनुमति दी थी जिसे अब अंतिम रूप से खारिज कर दिया गया है.
करूर भगदड़ हादसा और सीबीआई जांच
यह पूरा विवाद पिछले साल सितंबर में टीवीके प्रमुख (विजय) की रैली के दौरान हुए करूर हादसे से जुड़ा है, जिसमें बच्चों समेत 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. पुलिस ने आरोप लगाया था कि विजय के देर से आने के कारण भीड़ बेकाबू हुई और बुनियादी सुविधाओं की कमी से यह हादसा हुआ. वहीं टीवीके ने आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था. बाद में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 10 जुलाई को करूर का दौरा कर पीड़ित परिवारों को अनुकंपा पत्र सौंपे थे.
इस त्रासदी की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में मामले को राज्य की एसआईटी से सीबीआई (CBI) को सौंप दिया था. शीर्ष अदालत ने रिटायर्ड जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति भी गठित की है जो सीबीआई जांच की निगरानी कर रही है. सीबीआई फिलहाल भीड़ प्रबंधन, विजय के आने के समय और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की जांच कर रही है.
सवाल-जवाब
मद्रास हाईकोर्ट ने कार्यपालिका की शक्तियों पर क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका को बिना अंकुश की छूट मिलने से अराजकता फैलेगी और सरकारी नौकरियां बिना नियमों के बांटी नहीं जा सकतीं.
करूर भगदड़ मामले की जांच कौन सी एजेंसी कर रही है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करूर भगदड़ मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) कर रही है, जिसकी निगरानी तीन सदस्यीय समिति कर रही है.
About the Author
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
और पढ़ें