Last Updated:
Monsoon Hair Care Tips: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं नमी और गंदगी के कारण बालों और सिर की त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं भी बढ़ जाती हैं. इस मौसम में वातावरण में बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव तेजी से पनपते हैं. जिसका असर सिर की त्वचा पर भी पड़ता है. इसके कारण बाल झड़ना, रूसी, खुजली और संक्रमण जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं. ऐसे में कुछ देशी उपाय आपके लिए लाभदायक हो सकते है. इस मौसम में समय रहते उचित देखभाल और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है.
पलामू जिले के मेदिनीनगर के एक्सपर्ट शिव कुमार पांडे ने लोकल18 को बताया कि बरसात के दिनों में सिर की नियमित सफाई और प्राकृतिक चीजों का उपयोग बालों के लिए अधिक लाभकारी होता है.
बालों में नींबू का रस लगाने से सिर की त्वचा साफ रहती है और रूसी की समस्या कम होती है. इसी तरह आंवले का रस बालों की जड़ों को पोषण देने के साथ उन्हें मजबूत बनाने में मदद करता है. मुल्तानी मिट्टी से बाल धोने पर सिर की अतिरिक्त चिकनाई और गंदगी निकल जाती है, जिससे बाल स्वस्थ और साफ रहते हैं.
इसके अलावा आप खीरे का रस भी सिर की त्वचा को ठंडक पहुंचाने और नमी बनाए रखने में उपयोगी माना जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू उपचारों में प्याज का रस भी काफी प्रभावी माना जाता है. इसका इस्तेमाल नहाने से पहले एक चम्मच प्याज के रस में लगभग छह चम्मच पानी मिलाकर सिर की त्वचा पर लगाने से लाभ मिल सकता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
प्याज में मौजूद सल्फर युक्त तत्व बालों की जड़ों को मजबूती देने में सहायक होते हैं और सिर की त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. नियमित उपयोग से रूसी और सिर की खुजली जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है.
हालांकि यदि किसी व्यक्ति को प्याज से एलर्जी या जलन महसूस हो, तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले तेज रासायनिक तत्वों वाले शैंपू का अधिक इस्तेमाल करने के बजाय प्राकृतिक उपाय अपनाना कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
साथ ही संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, साफ-सफाई और नियमित रूप से बाल धोने की आदत भी बालों को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यदि बालों का झड़ना लंबे समय तक बना रहे या संक्रमण की समस्या गंभीर हो जाए, तो त्वचा एवं बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है.