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West Asia Conflict: अमेरिका ईरान जंग में इ साल 16 भारतीयों की मौत हुई और 75 घायल हुए. DG शिपिंग और यूनियनों के तहत मृतक नाविकों के परिजनों को 10 से 12 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा रहा है. 5 मामलों में भुगतान हो चुका है. इसके अलावा कतर हादसे के पीड़ितों को PMNRF से 2 लाख की मदद दी गई है.
सरकार ने जानकारी दी.
वेस्ट एशिया के समंदर में बारूद के धुएं के बीच कई भारतीय परिवारों के चिराग बुझ गए. ईरान-अमेरिका जंग के बीच संकट की इस घड़ी में 16 भारतीय अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि 75 घायल हुए हैं. अपनों को खोने का दर्द कभी भरा नहीं जा सकता लेकिन इस त्रासदी की घड़ी में विदेश मंत्रालय (MEA) ने पीड़ितों को मिली राहत और मुआवजे का एक-एक हिसाब संसद के सामने रख दिया है. जानिए 10 लाख से 12 लाख रुपये तक की अनुग्रह राशि, बीमा क्लेम और सरकार की तरफ से मिली मदद का पूरा सच.
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 में भड़के संघर्ष की चपेट में आने से कुल 16 भारतीय नागरिकों की जान गई है, जिनमें 10 भारतीय नाविक शामिल हैं. यह भी साफ किया गया कि कतर के रास लफ्फान गैस प्लांट में हुए एक अलग तकनीकी हादसे में 12 अन्य भारतीयों की मौत हुई थी जिसका इस युद्ध या सैन्य संघर्ष से कोई संबंध नहीं था. सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी मृतकों के पार्थिव शरीर को परिजनों तक पहुंचाने के लिए तुरंत सहायता दी गई है जबकि घायलों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है.
पीड़ित परिवारों को कितनी आर्थिक मदद?
सरकार ने प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले वित्तीय मुआवजे का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया है:
• डीजी शिपिंग वेलफेयर स्कीम: युद्ध क्षेत्र में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के आश्रितों को डीजी शिपिंग वेलफेयर स्कीम के तहत 10 लाख की अनुग्रह राशि प्रदान की जाती है.
• यूनियन और बीमा से राहत: मैरिटाइम यूनियन ऑफ इंडिया के तहत मर्चेंट नेवी अधिकारियों के परिजनों को 12 लाख और नेशनल यूनियन ऑफ सीफेरर्स ऑफ इंडिया के तहत क्रू सदस्यों के परिजनों को 10 लाख तक का अतिरिक्त मुआवजा मिलता है. इसके अतिरिक्त, जहाजों के P&I इंश्योरेंस के तहत मिलने वाले क्लेम की प्रक्रिया भी जारी है.
• भुगतान की स्थिति: विदेश मंत्रालय के अनुसार, 16 में से 5 मामलों में मुआवजे का भुगतान पहले ही पूरा किया जा चुका है.
• कतर हादसे के पीड़ितों को सहायता: कतर के गैस प्लांट हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक भारतीय के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से ₹ लाख की अनुग्रह राशि मंजूर की गई है.
रेस्क्यू ऑपरेशन और 24×7 हेल्प डेस्क
संकट के बीच फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार ने व्यापक इंतजाम किए. प्रभावित इलाकों में भारतीय दूतावासों ने 24×7 हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम और रैपिड रिस्पॉन्स सेल (RRC) के जरिए भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता पहुंचाई. जरूरतमंदों को ट्रांजिट वीजा, भोजन, ठहरने की व्यवस्था और यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराकर सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया. सरकार भविष्य में किसी भी आकस्मिक वैश्विक संकट से निपटने के लिए एक मजबूत डिजिटल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम भी विकसित कर रही है ताकि आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा और निकासी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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