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Wildlife Rescue Centre: वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में यह रेस्क्यू सेंटर एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा है. यहां अब तक 125 हिरणों सहित 1000 से अधिक वन्यजीवों को सुरक्षित आश्रय दिया जा चुका है. इनमें कई ऐसे जीव भी शामिल हैं जिन्हें शिकारियों के चंगुल, दुर्घटनाओं या गंभीर चोटों से बचाकर यहां लाया गया था. विशेषज्ञों की निगरानी में उनका उपचार, पुनर्वास और देखभाल की जाती है. स्वस्थ होने के बाद उपयुक्त वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाता है. यह केंद्र न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती दे रहा है, बल्कि लोगों में जैव विविधता और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रहा है.
बाड़मेर. जहां अक्सर घायल या बेसहारा वन्यजीव इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं वहीं बाड़मेर जिले के कातरला गांव के युवाओं ने इंसानियत और प्रकृति प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है. कोविड काल में शुरू हुई एक छोटी-सी पहल आज ‘अमृता देवी वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर’ के रूप में विकसित हो गई है. यहां 1,000 से अधिक वन्यजीव और पक्षियों की देखभाल की जा रही है.
कहते हैं कि अगर किसी काम को करने के लिए मन में ठान लिया जाए तो वो काम पूरा हो ही जाता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है धोरीमन्ना क्षेत्र के कातरला गांव के युवाओं ने. कोरोना महामारी के दौरान कई घायल और बीमार पक्षी व वन्यजीव इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे थे. यह देखकर कातरला गांव के कुछ युवाओं ने उन्हें बचाने का संकल्प लिया. धीरे-धीरे गांव के अन्य लोग भी इस मुहिम से जुड़ते गए और आज 29 ग्रामीणों के सहयोग से यह रेस्क्यू सेंटर लगातार संचालित हो रहा है.
भामाशाहों के सहयोग से चल रहा रेस्क्यू सेंटर
कातरला निवासी सगराम खिलेरी ने सड़क किनारे एक बीघा जमीन रेस्क्यू सेंटर के लिए दी है. अब यह सेंटर अमृता देवी वन्यजीव संरक्षण संस्थान के नाम से संचालित हो रहा है. अमृता देवी वन्यजीव संरक्षण संस्थान के अध्यक्ष जगदीश भादू के मुताबिक गांव में हिरण का शिकार हुआ था. गांव के लोगों ने पुलिस-प्रशासन से कार्यवाही करने की मांग करते हुए संरक्षण को लेकर रेस्क्यू सेंटर खोलने की गुहार लगाई थी. सरकारी स्तर पर मदद नहीं मिली तो गांव के लोगों ने मिलकर एक संस्थान बनाई है और अब यहां एक हजार से अधिक वन्यजीव का आशियाना बन गया है.
1 हजार से ज्यादा वन्यजीवों का बना सुरक्षित ठिकाना
बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना उपखंड मुख्यालय से महज 8 किमी दूर अमृता देवी वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में वर्तमान में करीब 1,000 से अधिक वन्यजीव और पक्षी सुरक्षित हैं. इनमें लगभग 125 हरिण, 400 कबूतर, 15 खरगोश, 1 बतख, 2 हंस, कछुए ,मोर सहित कई अन्य वन्यजीव शामिल हैं. घायल अवस्था में मिलने वाले जीवों का यहां उपचार किया जाता है और स्वस्थ होने पर उन्हें दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाता है.
घायल वन्यजीवों के लिए बना सुरक्षित ठिकाना
यहां बरसो से सेवा कर रहे रामजीवन के मुताबिक रेस्क्यू सेंटर में सड़क दुर्घटना, शिकारियों के हमले या अन्य कारणों से घायल हुए वन्यजीवों को लाया जाता है. यहां उनकी देखभाल कर उन्हें नया जीवन दिया जाता है. कई ऐसे वन्यजीव भी हैं जो गंभीर रूप से घायल होने के कारण जंगल में वापस नहीं जा सकते है इसलिए यही सेंटर उनका स्थायी घर बन गया है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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