Last Updated:
दियारा या दियरा की खेती नदी के आस पास के क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को बोला जाता है. हालांकि यहां पर दियरा की खेती नदी के बीच बने टीलों पर होने वाली खेती से है. खेती के समय में आप जब भी गंडक नदी के किनारे जाते हैं तो आपको नाव देखने को मिलता है जिसके सहारे किसान नदी के बीच जाकर खेती करते हैं. इसके साथ ही नदी के किनारे ही किसानों की साइकिल और अन्य छोटे मोटे सामान भी देखने को मिलते हैं.
महराजगंज: नेपाल के पहाड़ों से निकलकर कई छोटी बड़ी नदियां भी महराजगंज जिले से होकर गुजरती हैं. नेपाल से आने वाली नदियां भी यहां के लोगों के जीवन से जुड़ी हुई हैं और इन नदियों का प्रभाव यहां के स्थानीय लोगों के जीवन पर भी देखने को मिलता है. महराजगंज जिले का एक बड़ा हिस्सा भारत नेपाल सीमा क्षेत्र में आता है और जिले की एक बड़ी आबादी इन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहती है.
सामान्य रूप से कहें तो सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों का जीवन नदियों से भी जुड़ा हुआ है और इनमें से खासकर ग्रामीण किसानों का जीवन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. जिले के निचलौल क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र में एक अलग तरह का नज़ारा भी देखने को मिलता है जो जिले में अन्य दूसरे जगह से काफी अलग नजर आता है. नेपाल के पहाड़ों से निकलकर आने वाली गंडक नदी जिसे हम नारायणी के नाम से भी जानते उसके बीच में बने टीले पर यहां के स्थानीय किसान खेती करते हैं.
नदी का टीला होता है दियारा
गंडक नदी के बीच में सीमावर्ती क्षेत्र के किसान जो खेती करते हैं वो बहुत ही अलग तरह का दिखता है. इस खेती की बात करें तो इसे स्थानीय भाषा में दियरा या दियारा के नाम से भी जाना जाता है. किसी आम आदमी के लिए यह बहुत ही अलग और डरावना भी हो सकता है लेकिन जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले किसान आज के समय में भी दियरा की खेती करते हैं. यह खेती देखने में जितना अनोखा है उससे कई गुना अधिक खतरनाक भी है. नदी के बीच में बने इन टापुओं की बात करें तो यह नदी के बहाव के साथ आने वाले बालू के एकत्रित होने की वजह से बनते हैं.
हालांकि यहां की स्थिति इस मामले में भी काफी अलग है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि पहले गंडक नदी का ज्यादातर बहाव पूर्व दिशा में ही था लेकिन समय के साथ नदी के कटान होने की वजह से बहुत से किसानों की खेती भी नदी में चली गई. इतना कुछ होने के बावजूद भी यहां के किसानों ने हार नहीं मानी और आज के समय में भी नाव के सहारे बीच नदी में जाकर भी खेती करते हैं और फसल भी उगाते हैं जो बहुत ही खतरनाक काम है.
काफी खतरनाक तरीके से होती है खेती
सामान्य तौर पर दियारा या दियरा की खेती नदी के आस पास के क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को बोला जाता है. हालांकि यहां पर दियरा की खेती नदी के बीच बने टीलों पर होने वाली खेती से है. खेती के समय में आप जब भी गंडक नदी के किनारे जाते हैं तो आपको नाव देखने को मिलता है जिसके सहारे किसान नदी के बीच जाकर खेती करते हैं. इसके साथ ही नदी के किनारे ही किसानों की साइकिल और अन्य छोटे मोटे सामान भी देखने को मिलते हैं. जिन्हें वह नदी के किनारे ही रखकर नाव से खेती करने के लिए दियरा पर चले जाते हैं और आते समय नाव को नदी के किनारे पर खड़ा करने के बाद उसे रस्सी से किसी पेड़ में बांध देते हैं.
किसी अलग क्षेत्र के व्यक्ति के लिए यह खेती बहुत हो अजीब और खतरनाक लग सकता है लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों के लिए यह एक जीवन का हिस्सा है. नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच किसान अपने फसल को उगाने के लिए इतना खतरे से मोल लेते हैं.
About the Author
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
और पढ़ें