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मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना में कई खामियां…:सीएमईजीपी योजना पर रोक, खामियों में...




मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ड्रीम प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना (सीएमईजीपी) पर उनके ही आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस योजना में कई खामियों और सही लाभुक तक योजना का लाभ नहीं मिलने से सीएम नाराज चल रहे थे। अब इस योजना में आवश्यक जरूरी संशोधन करने के बाद इसे पुन: शुरू किया जाएगा। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 10185 लाभुकों का लोन मंजूर होने के बाद भी आवेदकों को राशि आवंटित नहीं की गई। दरअसल इस योजना में कई तरह की खामियां उजागर हुईं। इस योजना में किसी आवेदनकर्ता के आवेदन का कोई क्रॉस चेक नहीं होना, जिला द्वारा बेहिसाब आवेदनों को एप्रुवल देना और लोन लेने के बाद उसकी रिकवरी का कोई सिस्टम नहीं होने से इसमें कई तरह की तकनीकी अड़चनें सामने आ रही थीं। इसलिए फिलहाल इस योजना में आवश्यक जरूरी संशोधन होने तक रोक लगा दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष में कोई राशि जारी नहीं हुई

क्या है योजना… झारखंड सरकार के आदिवासी, ओबीसी एवं अल्पसंख्‍यक कल्याण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत राज्य में निवास करने वाले आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बेरोजगार युवक- युवतियों को स्वरोजगार के लिए 50 हजार रुपए से लेकर 25 लाख रुपए तक लोन देने का प्रावधान किया गया है। जिसमें 40 प्रतिशत सब्सिडी होती है। इसके आवेदन और राशि जिला स्तर पर ही स्वीकृत किए जाते हैं। इसके बाद आवेदन को कल्याण विभाग को भेजा जाता है, जहां बैंकों के माध्यम से लाभुकों को लोन की राशि आवंटित की जाती है। 10,185 आवेदन लंबित… मंजूरी के बाद भी नहीं मिला लोन
योजना के तहत पिछले दो साल में करीब 10,185 आवेदन लंबित हैं। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 160 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गयास, मगर केवल 40 करोड़ रुपए ही आवंटित हुए। चालू वित्तीय वर्ष में एक रुपया भी आवंटित नहीं हुआ। एसटी के 2,566, एससी के 1,650, पिछड़ा वर्ग के 4,531 और अल्पसंख्यक वर्ग के 1,438 आवेदन लंबित हैं। 3 मामलों से समझिए स्थिति इसलिए लगी रोक… खामियों के कारण वास्तविक लाभुक वंचित हो रहे थे, सुधार हो रहा
इस योजना में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिससे वास्तविक लाभुक लोन लेने से वंचित हो रहे थे। इसकी शिकायतें सरकार को मिल रही थीं। इसलिए अब सरकार ने तय किया गया है कि इसमें जरूरी आवश्यक संशोधन किया जाए। नया प्रारूप कर फिर से लागू किया जाएगा। – एएस. कच्छप, एमडी एसटी-ओबीसी कल्याण निगम



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