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कम बारिश में धान की खेती के लिए अपनाएं छींटा विधि, चुनें कम अवधि वाली किस्में

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Palamu Low Rainfall Paddy Cultivation Tips: कम बारिश की वजह से इस बार धान की बुवाई में काफी समस्या आ रही है जिससे किसान चिंतित हैं. इस बारे में पलामू के एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश शाह का कहना है कि किसान छींटा विधि का प्रयोग करें और धान की ऐसी किस्में चुनें जो कम समय में तैयार हो जाती हैं.

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पलामू. झारखंड-बिहार में खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है. वहीं, इस वर्ष कम बारिश होने से खेती काफी प्रभावित हुई है. पलामू जिले की बात करें तो यहां कम बारिश होने से किसान धान की खेती को लेकर चिंतित हैं. वहीं, कुछ इलाकों में धान की खेती की जा रही है. बता दें कि पलामू जिले में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ खेती प्रभावित हुई है. जिले के कई किसान अब तक धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं, जबकि कई किसानों की नर्सरी भी तैयार नहीं हो सकी है.

दरअसल, जिले में लगातार बारिश नहीं होने से खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि किसानों के पास अभी भी धान की खेती का अवसर है और सही किस्म का चयन कर नुकसान को कम किया जा सकता है. कम अवधि वाली धान की किस्मों की खेती टांड़ वाले खेतों में भी की जा सकती है.

कम अवधि वाली किस्मों का करें चयन
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह ने लोकल18 को बताया कि जिन किसानों के पास धान का बिचड़ा तैयार है, वे उपलब्ध नमी का लाभ उठाकर जल्द रोपाई करें. जिन किसानों की नर्सरी तैयार नहीं हो सकी है, वे कम अवधि वाली धान की किस्मों का चयन करें. टांड़ या ऊंची जमीन के लिए बाकर धान और ब्राउन बोरा जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं. अगर किसान हाइब्रिड धान की खेती करना चाहते हैं, तो पीएससी-807 उपयुक्त विकल्प है, जिसकी फसल करीब 100 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है.

छींटा विधि से करें सीधी बुआई
कम बारिश की स्थिति में सीधी बुआई यानी छींटा विधि किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है. इस तकनीक में धान के बीज को सीधे खेत में बिखेरकर बुआई की जाती है. इससे नर्सरी तैयार करने और बाद में रोपाई कराने का अतिरिक्त खर्च बच जाता है. यह विधि विशेष रूप से टांड़ वाले खेतों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जहां पानी का ठहराव कम होता है और सीमित नमी में भी खेती की जा सकती है.

लंबी अवधि वाली फसल में बढ़ सकता है जोखिम
उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसम को देखते हुए लंबी अवधि वाली धान की खेती जोखिम भरी हो सकती है. अगर फसल देर से लगती है, तो फूल आने का समय ठंड के मौसम में पहुंच जाता है. ऐसे समय में कम तापमान के कारण दानों का भराव ठीक से नहीं हो पाता और उत्पादन प्रभावित होता है. इसलिए किसानों को कम अवधि वाली किस्मों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है.

खरपतवार नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान
छींटा विधि से बुआई करने वाले किसानों को खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए. सीधी बुआई वाले खेतों में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. इसके लिए समय पर निराई-गुड़ाई या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खरपतवारनाशी का उपयोग करने से अच्छी उपज पायी जा सकती है. उन्होंने कहा कि मौसम के अनुसार सही तकनीक और उचित प्रबंधन अपनाकर किसान कम बारिश की स्थिति में भी धान की सफल खेती कर सकते हैं.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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