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देवेंद्रनाथ महतो के साथ JPSC प्रोटेस्ट का और कौन-कौन चेहरा है? जानिए...


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JPSC Protest: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं. देवेंद्रनाथ महतो आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं. उनके साथ ब्रह्मानंद महतो, सबिता कुमारी, अर्चना कुमारी, राहुल क्रांति कुमार, रूपेश कुमार और उम्मे हबीबा भी सक्रिय हैं. कोई सालों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है तो कोई लंबे समय से JPSC परीक्षा दे रहा है. प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रीलिम्स रद्द करने, कथित गड़बड़ियों की जांच और JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं. अब आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है.

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महतो के साथ JPSC प्रोटेस्ट के 7 चेहरे कौन? जिन्होंने सोरेन सरकार हिला दीZoom

JPSC Protest में देवेंद्र महतो के साथ कौन-कौन से 7 युवा भूख हड़ताल पर हैं? (फोटो PTI)

JPSC Protest: देश अभी NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को भूला नहीं था कि झारखंड में एक और छात्रों का आंदोलन शुरू हो गया. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र बारिश के बीच धरने पर बैठे हैं. कुछ छात्र कई दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं. इनमें देवेंद्रनाथमहतो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. 30 साल के महतो चार दिनों से खुले आसमान के नीचे पतली चटाई पर लेटे हैं. उनकी सफेद शर्ट बारिश और पसीने से भीग चुकी है. साथी उनके हाथ-पैर दबा रहे हैं और डॉक्टर उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं. महतो पहले पानी भी नहीं पी रहे थे. बाद में सोनम वांगचुक से बात होने के बाद उन्होंने पानी पीना शुरू किया.

JPSC आंदोलन की कहानी सिर्फ देवेंद्र महतो तक सीमित नहीं है. उनके साथ कई ऐसे युवा हैं, जिनकी अपनी अलग कहानी और संघर्ष है. कोई करीब 20 साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है, तो कोई लंबे समय से JPSC की परीक्षाएं दे रहा है. कोई छात्र नेता के तौर पर आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है और कोई महिला अभ्यर्थी के तौर पर भूख हड़ताल में शामिल हुई है. आंदोलनकारियों की मांग है कि 14वीं JPSC प्रीलिम्स को रद्द किया जाए, कथित अनियमितताओं की जांच हो और JPSC-JSSC की भर्ती व्यवस्था में बड़े सुधार किए जाएं. ऐसे में सवाल है कि महतो के साथ खड़े ये सात चेहरे कौन हैं और आखिर क्यों इन्होंने अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी छोड़कर आंदोलन का रास्ता चुना है?

आंदोलन 25 जुलाई से सत्याग्रह के तौर पर शुरू हुआ था. (फोटो क्रेडिटः इंस्टाग्राम devmahto_6040)

JPSC प्रोटेस्ट के ये 7 चेहरे क्यों हैं चर्चा में?

  • ब्रह्मानंद कुमार महतो के साथ देवेंद्रनाथ महतो, सबिता कुमारी, अर्चना कुमारी, राहुल क्रांति कुमार, रूपेश कुमार और उम्मे हबीबा आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. इनमें कई लोग भूख हड़ताल पर हैं, जबकि बाकी आंदोलन को मजबूती देने में जुटे हैं. इन सभी की कहानी अलग है, लेकिन मांग एक ही है भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच.
  • देवेंद्रनाथ महतो से लेकर उम्मे हबीबा तक ये चेहरे अब झारखंड के उस युवा वर्ग की आवाज बन रहे हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद लगाए बैठा है. आंदोलनकारियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में सवाल उठने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है.
  1. देवेंद्रनाथ महतो: देवेंद्रनाथ महतो आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जा रहे हैं. वह झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा से जुड़े छात्र नेता बताए जाते हैं. उन्होंने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. बताया गया कि शुरुआत में उन्होंने अन्न और पानी दोनों छोड़ दिया था. तबीयत बिगड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें पानी पीने के लिए मनाया. इसके बाद उन्होंने पानी तो लिया, लेकिन अनशन जारी रखा. देवेंद्रनाथ भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और सरकारी नौकरी की प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं. उनके आंदोलन को लेकर कई जगह उन्हें ‘वांगचुक 2.0’ भी कहा गया.
  2. ब्रह्मानंद कुमार महतो: रामगढ़ के 30 साल के ब्रह्मानंद कुमार महतो इस आंदोलन का सबसे भावुक चेहरा हैं. उन्होंने बॉटनी में पीएचडी की है. इसके बावजूद सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर उनकी नाराजगी कम नहीं हुई. वह चार दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में खुले आसमान के नीचे अनशन कर रहे हैं. महतो बताते हैं कि उन्होंने इससे पहले कभी भूख हड़ताल नहीं की थी. वह बस प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और चटाई पर लेट गए. अब बारिश और कमजोरी के बीच भी उनका अनशन जारी है. उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता कि यह लड़ाई कितने दिन चलेगी, लेकिन अगर न्याय के लिए यहीं रहना पड़ा तो वह तैयार हैं. वह JSSC कीटपालक भर्ती सहित कई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं. फिलहाल साथी प्रदर्शनकारी उनकी देखभाल कर रहे हैं और डॉक्टर उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं.
  3. राहुल क्रांति कुमार: 40 साल के राहुल क्रांति कुमार की कहानी उन युवाओं की बेचैनी बताती है जो सालों से सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं. राहुल करीब 20 साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. उनका दावा है कि हाई स्कूल TGT परीक्षा में उन्हें 172 अंक मिले, फिर भी उनका चयन नहीं हुआ. परिवार चलाने के लिए वह ट्यूशन पढ़ाते हैं. इतने लंबे समय तक तैयारी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने का दर्द उनके शब्दों में साफ दिखाई देता है. उनका कहना है कि युवावस्था निकल गई और अब सड़क पर बैठकर अनशन करना ही उनके पास बचा है. राहुल की कहानी आंदोलन में इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सिर्फ किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं दिखाती. यह उस अभ्यर्थी की निराशा सामने लाती है जिसने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा सरकारी नौकरी की तैयारी में लगा दिया.
  4. सबिता कुमारी: सबिता कुमारी भी इस आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. वह मंगलवार रात से अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल हुईं. उनका आंदोलन JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ है. महिला छात्रों की भागीदारी बढ़ने से आंदोलन का दायरा और व्यापक हुआ है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली युवतियां भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति की मांग कर रही हैं. सबिता का अनशन इसी असंतोष की तस्वीर पेश करता है.
  5. अर्चना कुमारी: अर्चना कुमारी ने भी सबिता के साथ मंगलवार रात से अनशन शुरू किया. दोनों महिला अभ्यर्थियों की मौजूदगी ने आंदोलन में युवतियों की भागीदारी को सामने ला दिया है. अर्चना की मांग भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी है. आंदोलनकारियों के मुताबिक, परीक्षा देने वाले युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होगा.
  6. रूपेश कुमार: रूपेश कुमार छात्र नेता के तौर पर आंदोलन में सक्रिय हैं. वह भी मंगलवार रात से अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भूख हड़ताल में शामिल हुए. वह आंदोलन की मांगों को आगे बढ़ाने और अभ्यर्थियों को एकजुट करने में भूमिका निभा रहे हैं. रूपेश की भूमिका सिर्फ अनशन तक सीमित नहीं है. वह प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों को सामने रखने और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को मजबूती देने वाले चेहरों में शामिल हैं.
  7. उम्मे हबीबा:  रांची की JPSC अभ्यर्थी उम्मे हबीबा भी आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं. वह लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं. बताया गया कि करीब 10 दिनों तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल रहने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल का रास्ता चुना. हबीबा का आंदोलन में शामिल होना यह बताता है कि प्रदर्शन अब सिर्फ छात्र नेताओं तक सीमित नहीं है. लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी भी अपनी मांगों के लिए सीधे मैदान में उतर रहे हैं.

JPSC आंदोलन की बड़ी मांगें क्या हैं?

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक आंदोलन 25 जुलाई से सत्याग्रह के तौर पर शुरू हुआ था. 29 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना जारी है. प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रीलिम्स को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा कथित अनियमितताओं की CBI या ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने और JPSC-JSSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग भी उठाई जा रही है. आंदोलनकारियों का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो कई सालों तक तैयारी करते हैं. यही वजह है कि आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा के नतीजे तक सीमित नहीं रह गया है. यह भर्ती व्यवस्था में बदलाव की बड़ी मांग में बदलता जा रहा है.

महतो के साथ कौन-कौन से नाम आंदोलन में सक्रिय?

देवेंद्रनाथ महतो और सात प्रमुख अनशनकारियों के अलावा मोहम्मद शमशेर आलम, जीवन कुमार और रविंद्र कुमार पासवान भी आंदोलन में सक्रिय बताए जा रहे हैं. मोहम्मद शमशेर आलम प्रदर्शन स्थल पर प्लेकार्ड लेकर अपनी बात रखते हैं. जीवन कुमार को JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच का प्रवक्ता बताया गया है. उन्होंने बताया कि मंगलवार रात से पांच लोग, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं, अनशन पर बैठे. प्रदर्शनकारियों के प्रवक्ता रविंद्र कुमार पासवान भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों को सामने रखते हैं. इस तरह स्टेडियम में चल रहा प्रदर्शन कई चेहरों और कई व्यक्तिगत संघर्षों को जोड़ रहा है.

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती, अब आगे क्या?

JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे आने के बाद शुरू हुआ विवाद अब भूख हड़ताल तक पहुंच चुका है. करीब 3.5 लाख छात्रों के परीक्षा में शामिल होने और 103 पदों के मुकाबले 2,204 उम्मीदवारों के मुख्य परीक्षा के लिए चुने जाने के बीच कथित अनियमितताओं के आरोपों ने माहौल गर्म कर दिया है.

अब सरकार और JPSC के अगले कदम पर सबकी नजर है. एक तरफ आंदोलनकारी अपनी मांगों पर डटे हैं. दूसरी तरफ अनशन कर रहे युवाओं की सेहत भी चिंता का विषय है. सोनम वांगचुक के समर्थन और AISA की ओर से 7 अगस्त को विधानसभा घेराव की घोषणा के बाद आंदोलन का राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है. देवेंद्रनाथ‍ महतो की तरह इन सात युवाओं की कहानी एक बड़े सवाल की तरफ इशारा करती है. आखिर सरकारी नौकरी की तैयारी में सालों लगाने वाले युवाओं को भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा कब मिलेगा? यही सवाल फिलहाल झारखंड की राजनीति और प्रशासन के सामने भी खड़ा है.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…

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