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Ranchi Tree Man Prabhat Kumar: रांची के ट्रीमैन कहे जाने वाले प्रभात कुमार का जीवन पेड़-पौधों के आसपास ही घूमता है. वे पेड़ लगाने, उनकी देखभाल करने, लोगों को जागरूक करने और खाद बनाने जैसे तमाम काम करते हैं. इतना ही नहीं रिटायर हो चुके प्रभात कुमार 40 सालों से हर महीने 500 फलदार पौधे मुफ्त में गरीबों को बांटते हैं.
रांची. रांची के प्रभात कुमार रिटायर्ड हैं और उन्हें पेड़-पौधों से इतना प्यार है कि उनकी जिंदगी इन्हीं के ईद-गिर्द घूमती है. वे अपना पूरा समय पेड़-पौधों को देते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने बताया कि ‘रिटायरमेंट के बाद जो एक बार पैसा मिला, बस उसी से जिंदगी चल रही है. मैं अकेला हूं और मुझे पर्यावरण से बहुत लगाव है. ऐसे में मैं घर पर ही हर महीने 500 पौधे तैयार करता हूं और दूर-दराज के गांवों के गरीब परिवारों को फ्री में देता हूं. खासकर फलदार पौधे जैसे आम, कटहल बांटता हूं.
क्योंकि जब यह पौधे 20-25 साल बाद बड़े होते हैं तो हजारों टन ऑक्सीजन देने का काम करते हैं. इस काम के लिए मैं किसी से एक भी रुपये चार्ज नहीं करता और न ही किसी का सहयोग लेता हूं. क्योंकि यह मेरा पैशन है और इसे मैं पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी मानता हूं. यह काम मैं पिछले 40 सालों से कर रहा हूं.’
लोगों को भी करते हैं प्रोत्साहित
प्रभात कुमार बताते हैं, ‘मैं लोगों को भी प्रोत्साहित करता हूं और उनसे कहता हूं कि कम से कम कुछ नहीं तो हर महीने 10 पौधे भी लोगों को दान करने चाहिए. हम अक्सर अपने घरों में कई तरह के खर्च करते हैं. यह भी एक बहुत जरूरी खर्च है, जो हम कर सकते हैं. क्योंकि यह खर्च आने वाली पीढ़ियों को भी लाभ देगा. हम जो पर्यावरण का फायदा उठाते हैं, तो इसके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी बनती है.
मैं दूर-दराज के गांवों में जाता हूं और ऐसे लोगों को चुनता हूं जिनके पास जीने के जरूरी संसाधन भी नहीं हैं. मैं उन्हें ये पौधे देता हूं और वे इतने खुश होते हैं कि दौड़कर आकर कहते हैं कि यह वाला मुझे भी चाहिए. जब मैं 6 महीने बाद जाता हूं तो देखता हूं कि ये पौधे काफी बड़े हो चुके होते हैं. मतलब वे इनका बहुत ख्याल रखते हैं.’
पौधों के लिए विशेष खाद करते हैं तैयार
प्रभात बताते हैं, ‘मैं पौधों के लिए विशेष खाद तैयार करता हूं और अपने हाथों से यह सारे पौधे तैयार करता हूं. सड़ा हुआ गोबर खाद, गार्डन का जो वेस्ट होता है, जैसे सड़े हुए पत्ते, गीले पत्ते, इसके अलावा केंचुआ खाद को मिलाकर फिर से सड़ा देता हूं और इसी से पूरे पौधे तैयार होते हैं. इस तरह ऑर्गेनिक खाद बनकर तैयार होती है. इसलिए इसकी जड़ और उसकी क्वालिटी शानदार होती है.’ इस प्रकार रांची के ट्रीमैन पर्यावरण सुधार की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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