भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

अयोध्या का नागेश्वरनाथ मंदिर, जिसकी स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश...


अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में इन दिनों ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंज रहे हैं. एक ओर जहां हर मठ और मंदिर में प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर उन्हें प्रसन्न करने में जुटे हैं. अयोध्या में स्थित सिद्धपीठ श्री नागेश्वरनाथ मंदिर भी भगवान शिव के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों में से एक है. आइए जानते हैं इस मंदिर की पौराणिक महिमा और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.

त्रेतायुग में हुई थी मंदिर की स्थापना

अयोध्या का श्री नागेश्वरनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्राचीन और पूजनीय मंदिरों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश ने कराई थी. यही कारण है कि यह मंदिर अयोध्या की आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

बाजूबंद से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक कथा

नागेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी प्रभाकर चतुर्वेदी बताते हैं कि एक बार महाराज कुश अयोध्या आए और स्वर्गद्वार स्थित सरयू नदी में स्नान करने लगे. स्नान के दौरान उनका बाजूबंद (कंकण) सरयू की धारा में गिर गया, जिसे नागराज कुमुद की पुत्री कुमुदिनी ने उठा लिया.

जब महाराज कुश को इसका पता चला तो उन्होंने क्रोधित होकर नागकन्या पर बाण चलाने का संकल्प लिया. कथा के अनुसार, नागराज कुमुद ने अपनी पुत्री की रक्षा के लिए भगवान शिव की आराधना की. भक्त की पुकार सुनकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और महाराज कुश से नागकन्या को अभयदान देने का आग्रह किया.

भगवान शिव के नाम पर पड़ा नागेश्वरनाथ नाम

भगवान शिव के दर्शन होते ही महाराज कुश का क्रोध शांत हो गया. उन्होंने नागकन्या को क्षमा कर दिया और भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की. साथ ही प्रार्थना की कि नागों पर कृपा करने के कारण इस स्थान पर भगवान शिव ‘नागेश्वरनाथ’ नाम से प्रसिद्ध हों. तभी से यह मंदिर नागेश्वरनाथ के नाम से विख्यात माना जाता है.

जलाभिषेक से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

स्वर्गद्वार क्षेत्र में सरयू तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां भगवान नागेश्वरनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही जीवन के कष्ट, रोग और बाधाएं भी दूर होती हैं.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर के गर्भगृह में नागों से अलंकृत शिवलिंग विराजमान है, जिसे अत्यंत चमत्कारी और कल्याणकारी माना जाता है. सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक परंपरा के अनुसार, नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या की प्राचीन शिव उपासना का प्रमुख केंद्र है और भगवान श्रीराम की नगरी की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top