भास्कर न्यूज | कोडरमा जिले में अपात्र राशन कार्डधारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। झारखंड सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निर्देश पर जिले में राशन कार्डों का विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी, बड़े कारोबारी, वाहन स्वामी, कंपनी निदेशक, दोहरे लाभुक समेत विभिन्न श्रेणियों में चिन्हित मामलों की जांच की जा रही है। जांच में अपात्र पाए जाने पर पूरे परिवार का राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा।खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने सभी उपायुक्तों को भेजे पत्र में निर्देश दिया है कि भारत सरकार से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित मामलों का त्वरित सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि समय पर कार्रवाई पूरी नहीं हुई तो भविष्य में जिले के खाद्यान्न आवंटन पर भी असर पड़ सकता है। जिला पूर्ति पदाधिकारी राम रतन बनवाल ने बताया कि जिले में अब तक करीब 500 राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। शेष चिन्हित मामलों का सत्यापन तेजी से चल रहा है और अगले कुछ दिनों में अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के पहले चरण में आयकरदाता, सरकारी सेवा में कार्यरत लोग तथा निर्धारित सीमा से अधिक कारोबार (ग्रॉस टर्नओवर) वाले लोगों को प्राथमिकता के आधार पर जांच में लिया गया है। पात्रता नहीं मिलने पर उनके राशन कार्ड नियमानुसार निरस्त किए जाएंगे। जिला पूर्ति पदाधिकारी ने लोगों से अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी पात्र व्यक्ति को वंचित करना नहीं, बल्कि अपात्र लोगों को सूची से हटाकर वास्तव में जरूरतमंद गरीब परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाना है। जिन गरीब परिवारों का नाम अब तक नहीं जुड़ पाया है या जिनके परिवार के पात्र सदस्यों का नाम छूटा है, उन्हें नियमानुसार योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार कोडरमा में हजारों मामलों को विभिन्न श्रेणियों में जांच के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी, वाहन स्वामी, कंपनी निदेशक, बड़े कारोबारी, दोहरे लाभुक तथा अन्य श्रेणियां शामिल हैं। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सूची अंतिम रूप से अपात्र लोगों की नहीं, बल्कि सत्यापन के लिए चिन्हित संभावित मामलों की है। अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
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