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एल नीनो से धान डूबा, पलामू के किसान कर रहे स्वीट कॉर्न...


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पलामू के किसान कर रहे स्वीट कॉर्न की खेती, कम लागत में 3 गुना कमाई

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Sweet Corn Instead Of Paddy: बरसात के इस सीजन में एल नीनो के प्रभाव से पलामू जिले के किसानों के सामने खेती को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. यहां कम बारिश के कारण टांड़ वाली जमीनों में धान की रोपाई नहीं हो पा रही है और कई खेत अब भी खाली पड़े हैं. ऐसे में किसान पारंपरिक खेती से हटकर ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जिनमें कम पानी में बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी मिल सके. इसमें किसान कुछ खास प्रभेद का चयन कर खेती कर सकते हैं.

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कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि पलामू में स्वीट कॉर्न की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है. सामान्य मक्के की तुलना में स्वीट कॉर्न का बाजार मूल्य कई गुना अधिक है और इसकी मांग शहरों, बाजारों, होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड स्टॉलों पर लगातार बनी रहती है. इसकी डिमांड भी ज्यादा है. पलामू में इसकी खेती अच्छे से की जा सकती है.

पलामू जिले के करकटा गांव के किसान शंकर मेहता ने भी पारंपरिक धान और गेहूं की खेती छोड़कर स्वीट कॉर्न की खेती शुरू की. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी टांड़ वाली जमीन में स्वीट कॉर्न लगाया है. वहीं पिछले साल भी टांड़ वाले खेत में लगाया था, लेकिन कम क्षेत्र में भी उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर बाजार भाव मिला.

जहां सामान्य मक्का 20 से 25 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं स्वीट कॉर्न 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक आसानी से बिक जाता है. यही वजह है कि अब वे अगले साल 10 कट्ठा जमीन में इसकी खेती करने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसानों को सही जानकारी और बाजार उपलब्ध हो जाए, तो स्वीट कॉर्न उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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स्थानीय या कम उत्पादन देने वाली किस्मों की बजाय उन्नत प्रभेद का चयन करना चाहिए. स्वीट कॉर्न के लिए शुगर-75, माधुरी, स्वीट ग्लोरी, गोल्डन स्वीट, हनी स्वीट, प्रिया स्वीट कॉर्न और सुपर स्वीट जैसी उन्नत किस्में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं. जबकि किसान सामान्य मक्का की खेती करना चाहते हैं, तो डीकेसी-9144, डीकेसी-9108, पायनियर-3396, पायनियर-1899, एनके-6240, बायोसीड-9544 और जेएमएच-1001 जैसी उन्नत संकर किस्मों का चयन कर सकते हैं. इन किस्मों में उत्पादन क्षमता अधिक होती है और मौसम की विषम परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में धान की रोपाई संभव नहीं हो पा रही है, वहां किसान समय रहते स्वीट कॉर्न या उन्नत मक्का की खेती अपनाकर नुकसान से बच सकते हैं. उचित बीज, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और सही प्रबंधन के साथ यह फसल कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है. ऐसे में बदलते मौसम और कम वर्षा की स्थिति में स्वीट कॉर्न पलामू के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है.



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