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Hazaribagh Treasure News: झारखंड के हजारीबाग में एक पुराना मिट्टी का घर बारिश में क्या ढहा, उसके अंदर छिपे राज से पूरा गांव हैरान रह गया. मलबा हटाया गया तो मिट्टी के एक पुराने कलश से एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों चांदी के सिक्के निकल आए. सिक्कों की चमक देखते ही गांव में भीड़ जुट गई और देखते ही देखते खबर हजारीबाग से लेकर रांची तक पहुंच गई. लेकिन, इस घटना की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतना बड़ा खजाना सामने होने के बावजूद 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी किसी ने एक सिक्का तक को हाथ नहीं लगाया है.
हजारीबाग में 200 साल पुराना मिट्टी का घर ढहा, मलबे से निकले 300 से ज्यादा चांदी के सिक्के (एआई जेनरेटेड)
हजारीबाग. झारखंड के हजारीबाग से लगभग 40 किलोमीटर दूर टाटीझरिया प्रखंड के अमनारी गांव के एक घर में खजाना मिला है. इस खजाने की चर्चा हजारीबाग से लेकर रांची तक पहुंच चुकी है. यह कौतूहल का विषय बन गया है कि आखिर मिट्टी के घर में इतना बड़ा खजाना कहां से आया है? जिस घर में यह खजाना मिला है उनके मालिक का कहना है कि यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है और इसके पीछे कुछ मान्यता भी है. यही कारण है कि 24 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी किसी व्यक्ति ने एक सिक्का तक नहीं छुआ है.
बारिश में गिरा पुराना मकान और निकल आया खजाना
टाटीझरिया प्रखंड का अमनारी गांव का चर्चा हजारीबाग के साथ ही पूरे झारखंड में हो रही है. बताया जाता है कि, इस गांव के एक पुराने मिट्टी का पुराना घर ढह गया, जिसके बाद खजाना निकला है. बारिश के कारण पुराना मिट्टी का मकान ढह जाने के बाद वर्षों पुराना छुपा हुआ खजाना बाहर आने की बात सामने आई है. जब घर ढहने लगा तो दीवार में रखे गए मिट्टी के कलश के फूटते ही 300 से अधिक प्राचीन चांदी के सिक्के मलबे में बिखर गए. सिक्कों की चमक देखते ही ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई.
झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड का अमनारी गांव अपने प्राचीन खजाने को लेकर चर्चा में है.
मिट्टी का कलश टूटा तो बिखर गए चांदी के सिक्के
यह पुराना मकान अमनारी निवासी बैजू महतो का है. घर जीर्ण शीर्ण होने के कारण बैजू महतो का परिवार पास ही बने ढलाई के पक्के मकान में रहता है. जब जोरदार बारिश हो रही थी तो पुराना मिट्टी का मकान सुबह-सुबह अचानक ढह गया. लेकिन इस मकान में कोई नहीं रहता है तो इससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. लेकिन, पुराना मकान गिरते ही दीवार के आले में रखा मिट्टी का एक कलश टूट गया और उसमें रखे लगभग 300 से अधिक चांदी के सिक्के जमीन पर बिखर गए. परिजनों को जब इसकी भनक लगी, तो वे भी अवाक रह गए.
हजारीबाग के अमनारी गांव में खजाना मिला तो लोगों की भीड़ जुट गई, लेकिन किसी ने उसमें हाथ लगाने की हिम्मत नहीं की.
200 साल पुराने घर से जुड़ी है परिवार की मान्यता
बैजू महतो के बेटे नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि यह उनके परिवार की संपत्ति है. यह घर लगभग 200 साल पुराना है. उनके पिता की उम्र लगभग 91 वर्ष है और चार पीढ़ी पहले का यह घर है. इन्होंने बताया कि इसके पहले भी दीवार गिरने से चांदी के सिक्के मिले हैं, लेकिन इस बार भारी मात्रा में चांदी के सिक्के दिख रहे हैं. इन्होंने बताया कि उनके घर की मान्यता है कि जो भी इन सिक्कों को अपने घर ले गया या फिर चोरी किया है तो उनके घर में अनहोनी हो जाती है. यही कारण है कि 24 घंटा बीतने को है, लेकिन कोई भी व्यक्ति ने एक सिक्का तक नहीं छुआ है.
अब दूसरे पुराने मकान की भी होने लगी चर्चा
नंद किशोर प्रसाद ने यह भी बताया कि वरीय पदाधिकारी उनके गांव पहुंचे थे. कुछ लोगों ने फोन भी किया था. सभी को यह जानकारी दे दी गई है कि सिक्का कैसे निकाला है. यह बात फैलते ही पूरे टाटीझरिया क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह संपत्ति बैजू महतो के पूर्वजों द्वारा सहेज कर रखी गई पुरानी धरोहर है. वहीं अब गांव में इस बात की भी चर्चा छिड़ गई है कि बैजू महतो के दिवंगत भाई स्वर्गीय बढ़न महतो का जो पुराना मिट्टी का घर है, उसकी दीवारों के भीतर भी इसी तरह चांदी के सिक्के रखे गए हो सकते हैं.
यह घर नंदकिशोर महतो का है, लेकिन उन्होंने भी खजाना छूने से इनकार कर दिया और कहा कि यह मिट्टी में ऐसे ही रहेगा.
आखिर कितने पुराने हैं ये सिक्के?
वहीं, टाटीझरिया के अंचल पदाधिकारी अमित कुमार झा ने बताया कि सिक्का मिलने की सूचना है. इसकी जानकारी जिला के वरीय पदाधिकारी को दे दी गई है. क्योंकि यह सिक्का उनके घर के दीवारों से मिली है इस कारण यह उनकी संपत्ति है. जमीन के अंदर से अगर यह प्राप्त होता तो यह सरकार की संपत्ति हो जाती. इन्होंने कहा कि जैसा वरीय पदाधिकारी का निर्देश होगा वैसा कदम उठाया जाएगा. सिक्का अभी भी यथावत पड़ा हुआ है. अब गांव में लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर ये सिक्के कितने पुराने हैं, इनकी असली कीमत क्या है और करीब दो सदियों पुराने इस मिट्टी के घर की दीवार में इन्हें आखिर किसने और क्यों छिपाकर रखा था?
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