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Animal Husbandry Tips: मानसून में बछड़ों को नाभि संक्रमण का खतरा बढ़ा,...


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मानसून में बछड़ों को नाभि संक्रमण का खतरा बढ़ा,दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधन

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Calf Navel Infection: मानसून में नमी और गंदगी के कारण नवजात बछड़ों में नाभि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. जावेद अख्तर के अनुसार, जन्म के बाद नाभि की सही सफाई नहीं होने और बछड़े को गीली जगह पर रखने से संक्रमण हो सकता है. नाभि में सूजन, मवाद, बदबू, बुखार, दूध कम पीना और सुस्ती इसके प्रमुख लक्षण हैं. संक्रमण बढ़ने पर यह जोड़ों और लीवर तक फैल सकता है. इससे बछड़े की जान भी जा सकती है. बचाव के लिए जन्म के तुरंत बाद नाभि की सफाई, साफ-सूखी जगह पर रखना और आधे घंटे के भीतर मां का खीस पिलाना जरूरी है.

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बोकारो: मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है. इसके साथ ही गंदगी और साफ-सफाई में कमी की वजह से नवजात बछड़ों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. इस मौसम में बछड़ों में नेवल इंफेक्शन यानी नाभि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. नाभि संक्रमण होने पर बछड़े को तेज बुखार हो सकता है. इसके अलावा कमजोरी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. अगर समय पर इलाज नहीं मिले तो संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है. गंभीर स्थिति में यह बछड़े की मौत का कारण भी बन सकता है. ऐसे में बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. जावेद अख्तर ने नवजात बछड़ों को नाभि संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी जानकारी साझा की है. उन्होंने पशुपालकों से जन्म के बाद बछड़े की नाभि की सही तरीके से देखभाल करने की अपील की है.

जीवाणु से होता है नाभि संक्रमण
पशु चिकित्सक के अनुसार, नाभि संक्रमण एक जीवाणु जनित बीमारी है. यह जन्म के तुरंत बाद से लेकर करीब 5 से 6 महीने तक के बछड़ों को प्रभावित कर सकती है. नवजात बछड़ों में इस संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है. जन्म के बाद अगर बछड़े की नाभि की सही तरीके से सफाई नहीं की जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा बछड़े को गीली और अस्वच्छ जगह पर रखने से भी संक्रमण होने की आशंका काफी बढ़ जाती है. मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर हो सकती है. बारिश की वजह से आसपास नमी बनी रहती है. अगर पशुशाला की नियमित सफाई नहीं होती है तो वहां बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. ऐसे में नवजात बछड़ों को संक्रमण से बचाने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

नाभि में सूजन और मवाद दिखे तो रहें सतर्क
नाभि संक्रमण होने पर बछड़े में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. उसकी नाभि में सूजन आ सकती है. नाभि से मवाद निकल सकता है. इसके साथ ही नाभि से बदबू भी आ सकती है. बछड़े को तेज बुखार हो सकता है. वह पहले की तुलना में कम दूध पी सकता है. वह काफी सुस्त भी नजर आ सकता है. इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

संक्रमण होने का खतरा
पशु चिकित्सक के अनुसार, समय पर इलाज नहीं मिलने पर संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है. इससे जोड़ों में संक्रमण होने का खतरा रहता है. इसके अलावा लीवर में भी संक्रमण फैल सकता है. ऐसी गंभीर स्थिति बछड़े के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इसलिए अगर नवजात बछड़े की नाभि में किसी तरह का बदलाव दिखाई देता है तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर जांच और उपचार मिलने से संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

जन्म के तुरंत बाद नाभि की करें देखभाल
नाभि संक्रमण से बचाव के लिए जन्म के तुरंत बाद नवजात बछड़े की नाभि की सही देखभाल करना जरूरी है. पशु चिकित्सक के अनुसार, जन्म के बाद नाभि को करीब दो इंच की दूरी पर साफ धागे से बांधना चाहिए. इसके बाद बची हुई नाल को साफ कैंची या ब्लेड से काटना चाहिए. नाभि को काटने के बाद उसकी अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए. इसके लिए बिटाडिन या टिंचर आयोडीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे नाभि में संक्रमण का खतरा कम करने में मदद मिलती है. पशुपालकों को इस पूरी प्रक्रिया के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. नाभि की देखभाल में लापरवाही नहीं करनी चाहिए. जन्म के शुरुआती दिनों में बछड़े की नियमित निगरानी भी जरूरी है.

बछड़े को साफ और सूखी जगह पर रखें
नवजात बछड़े को हमेशा साफ और सूखी जगह पर रखना चाहिए. उसकी नाभि को गंदगी और नमी के संपर्क में आने से बचाना जरूरी है. मानसून के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पशुशाला में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. फर्श और आसपास की जगह को नियमित रूप से साफ करना चाहिए. गीले बिछावन को तुरंत बदल देना चाहिए. इससे बछड़े के आसपास संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं का खतरा कम किया जा सकता है.

जन्म के आधे घंटे के भीतर पिलाएं खीस
पशु चिकित्सक ने नवजात बछड़े के खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी है. जन्म के करीब आधे घंटे के भीतर बछड़े को उसकी मां का खीस यानी पहला दूध जरूर पिलाना चाहिए. खीस नवजात बछड़े के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसमें ऐसे पोषक तत्व और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व होते हैं, जो शुरुआती दिनों में बछड़े को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. इसलिए जन्म के तुरंत बाद बछड़े को खीस पिलाने में देरी नहीं करनी चाहिए.

गौशाला की नियमित रूप से सफाई
पशुपालकों को गौशाला की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए. बछड़े के रहने की जगह को सूखा और स्वच्छ रखना चाहिए. साथ ही समय-समय पर पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच भी करानी चाहिए. पशु चिकित्सक का कहना है कि मानसून में थोड़ी सी सावधानी बरतकर नवजात बछड़ों को नाभि संक्रमण जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है. जन्म के तुरंत बाद नाभि की सही देखभाल, साफ-सफाई, सूखी जगह और समय पर खीस पिलाना बछड़े के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है.

About the Author

Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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