Last Updated:
Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के पलामू में एक ऐसा धार्मिक स्थल है. जहां एक ही परिसर में सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमूर्ति विराजमान हैं. जिसमें उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग की प्रतिमूर्ति भी शामिल है. सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. जो अकाल मृत्यु से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
पलामू: सावन का पावन महीना भगवान भोल नाथ का महीना माना जाता है. जहां शिव की भक्ति में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व होता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए श्रद्धालु लंबी यात्राएं करते हैं, लेकिन पलामू में एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां एक ही परिसर में सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमूर्ति विराजमान है. जहां खास बात यह है कि यहां उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग की भी प्रतिमूर्ति स्थापित है. श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.
रेड़मा चौक के पास है भगवती भवन
बता दें कि मेदिनीनगर के रेड़मा चौक के पास स्थित भगवती भवन मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर परिसर में दक्षिणेश्वर मां काली के साथ भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमूर्तियां स्थापित हैं. सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है और भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं.
महाकाल की मिट्टी से जुड़ी है मान्यता
मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि उज्जैन स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग की मिट्टी लाकर यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति स्थापित की गई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान महाकाल को अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला माना जाता है. इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति पर जल चढ़ाकर सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हैं.
60 साल पुरानी है ज्योतिर्लिंगों की परंपरा
शिबुल पंडित ने आगे बताया कि भगवती भवन में करीब 60 वर्षों से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमूर्तियां विराजमान हैं. मंदिर में इनकी स्थापना के लिए संबंधित ज्योतिर्लिंग स्थलों की मिट्टी, जल और मंत्रों का उपयोग किए जाने की परंपरा बताई जाती है. यही वजह है कि मंदिर का धार्मिक महत्व स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले भक्तों के बीच भी बना हुआ है.
1978 से मंदिर की सेवा में जुटे हैं पुजारी
मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित वर्ष 1978 से पूजा-अर्चना और मंदिर की सेवा से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि शास्त्रों में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसी आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर भगवान शिव के विभिन्न ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का अवसर मिलता है. जहां श्रद्धालुओं को एक हीं स्थल पर 12 ज्योर्तिर्लिंग की दर्शन होती है.
सावन में बढ़ता है श्रद्धालुओं का आगमन
उन्होंने कहा कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में भगवती भवन में भी भक्तों का आना-जाना बढ़ जाता है. लोग यहां पहुंचकर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करते हैं और जलाभिषेक कर भगवान शिव से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं और वर्षों पुरानी परंपरा के कारण पलामू का यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था का केंद्र बना हुआ है.
About the Author
अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
और पढ़ें