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सावन महीने की दूसरी सोमवारी पर शिवालयों में कई तैयारियां की गई हैं। इस बीच 12 अगस्त तक व्रत, उपवास और शिव साधना के लिए विशेष संयोग भी बन रहे हैं। इसके तहत 9 अगस्त को कामिका एकादशी, 10 अगस्त को सावन की दूसरी सोमवारी, 11 अगस्त को मास शिवरात्रि और 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर विशेष योग बन रहे हैं। इन दिनों में व्रत, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप और पितरों के निमित्त पौधरोपण करने से शिव कृपा, मनोकामना पूर्ति, संकटों से राहत और पितरों का आशीर्वाद मिलने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पूजन व शिव आराधना से दोगुना फल मिलने की मान्यता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है। 10 अगस्त को सावन की दूसरी सोमवारी है। ऐसे में सोमवार का संयोग होने से इसका धार्मिक महत्व अधिक है। इस दिन शिव आराधना, जलाभिषेक और प्रार्थना से मनोवांछित फल प्राप्ति की संभावना अधिक रहती है। इन दिनों रुद्राभिषेक और पौधरोपण का विशेष महत्व है। रुद्राभिषेक से शिव कृपा की मान्यता है। हर कामना के लिए अलग अभिषेक किया जाता है। सावन मास में भगवान शिव की आराधना के लिए रुद्राभिषेक को सबसे प्रभावी और फलदायी साधना माना गया है। सावन में शिवजी समाधि से जागकर सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इस दौरान रुद्री के आठ अध्यायों का पाठ कर दूध, जल, कुशा जल, गन्ने का रस, सरसों का तेल, तिल का तेल और पंचामृत से अभिषेक करने से कामनाओं की पूर्ति, गृह शांति, धन-धान्य, स्वास्थ्य, समृद्धि, रोग नाश और शत्रु पर विजय के लिए विशेष फलदायी माना गया है। सावन की दूसरी सोमवारी पर प्रदोष और शिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर मंत्रों के साथ गाय के दूध से रुद्राभिषेक करना श्रेष्ठ माना गया है। कई श्रद्धालु दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने पंचामृत या ऊसरा जल से भी अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 12 अगस्त, बुधवार को हरियाली अमावस्या पर देव और पितृ कार्य किए जाएंगे। इस दिन पड़ने वाली हरियाली अमावस्या काल सर्प दोष शांति के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है। इस दिन वैदिक विधि से नारायण नाग बली, त्रिपिंडी श्राद्ध और काल सर्प दोष शांति का अनुष्ठान किसी शिवालय या पवित्र नदी के तट पर कराना लाभकारी माना गया है। हरियाली अमावस्या पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण पर्व है। 11 अगस्त, मंगलवार को मास शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन सर्वसिद्धि योग और सिद्धि योग का निर्माण होगा। मास शिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र का जप, रुद्राभिषेक और शिव पूजन अत्यंत शुभ माना गया है।
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