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Boako Farmer Earned Well With Nenua Farming: बोकारो के किसान समाधी गोप ने 50 डिसमिल जमीन में मचान विधि से नेनुआ की खेती की है. इससे उन्होंने 1 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया. समाधी गोप बताते हैं कि नेनुआ की खेती में किन चीजों का ध्यान रखकर बढ़िया आमदनी पाई जा सकती है.
बोकारो. खेती में अगर सही तकनीक और फसल का चुनाव किया जाए तो कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है. बोकारो जिले के चास प्रखंड के काशीझरिया गांव के किसान समाधी गोप इसका उदाहरण पेश कर रहे हैं. उन्होंने 50 डिसमिल जमीन में मचान विधि से नेनुआ की खेती कर अच्छी कमाई का मॉडल तैयार किया है. उनकी खेती को देखकर आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जियों की खेती के लिए प्रेरित हो रहे हैं.
किसान परिवार से है ताल्लुक
लोकल 18 से खास बातचीत में किसान समाधी गोप ने बताया कि वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पूर्वज भी वर्षों से खेती करते आए हैं. खेती से जुड़ाव होने के कारण उन्होंने भी इसे अपनी आजीविका का जरिया बनाया. हालांकि, समय के साथ उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक और सब्जियों की खेती को अपनाना शुरू किया, जिससे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है.
35 से 45 दिनों में तैयार होती है फसल
आगे समाधी गोप ने बताया कि उन्होंने जून महीने में 50 डिसमिल जमीन पर नेनुआ की बुवाई की थी. नेनुआ की फसल सामान्य तौर पर करीब 35 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके बाद लगातार तोड़ाई शुरू हो जाती है और करीब तीन महीने तक फसल से उत्पादन लिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि 50 डिसमिल जमीन में नेनुआ की खेती करने में बीज, मचान तैयार करने, सिंचाई और अन्य जरूरी खर्च मिलाकर करीब 8 से 10 हजार रुपये की लागत आती है.
1 लाख तक की शुद्ध आमदनी
मौसम अनुकूल रहने पर 50 डिसमिल जमीन से पूरे सीजन में करीब 45 क्विंटल या इससे अधिक नेनुआ का उत्पादन पाया जा सकता है. वर्तमान में स्थानीय बाजार में नेनुआ करीब 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. अगर 45 क्विंटल यानी 4,500 किलो नेनुआ को औसतन 25 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाए तो करीब 1 लाख 12 हजार 500 रुपये की आमदनी हो सकती है. वहीं खेती की लागत करीब 8 से 10 हजार रुपये घटाने के बाद किसान के पास लगभग 1 लाख रुपये तक की शुद्ध आमदनी बच सकती है.
फसल की निगरानी भी जरूरी
वहीं आखिर में उन्होंने सलाह दी है कि बरसात के मौसम में नेनुआ की फसल में नमी के कारण कीट और रोग का प्रकोप बढ़ सकता है. खासकर पत्तियों पर कीट लगने से पौधों के विकास और उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों को समय-समय पर खेत की निगरानी करनी चाहिए और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दवा या जैविक उपायों का इस्तेमाल कर फसल को सुरक्षित रख बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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