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Jharkhand JPSC-JSSC Exam Controversy | Blacklisted TDPL Mastermind Exposed


झारखंड में JPSC-JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के केंद्र में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) है।

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आरोप है कि उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनी को झारखंड में परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम सौंपे गए। सवाल यह भी उठाया जा रहा कि परीक्षा प्रक्रिया के कई संवेदनशील जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को क्यों दी गई।

विवाद की शुरुआत JPSC की दो परीक्षाओं के रिजल्ट से हुई। पहली परीक्षा सहायक लोक अभियोजक (APP) भर्ती परीक्षा और दूसरी 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा थी। दोनों परीक्षाओं के रिजल्ट को लेकर आयोग के सदस्यों की आपत्ति सामने आई। हालांकि, आपत्ति दर्ज कराने वाले सदस्यों के नाम अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

जहां की विवादित कंपनी, वहीं आंदोलन को मिला समर्थन..

झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों ने BHU परिसर में एक दिवसीय उपवास रखकर झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों समर्थन किया है।

झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों ने BHU परिसर में एक दिवसीय उपवास रखकर झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों समर्थन किया है।

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और आंदोलनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ सीएम हेमंत सोरेन का पुतला फूंका। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता लंका गेट जुटे और प्रदर्शन किया। इस दौरान झारखंड सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और आंदोलनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ सीएम हेमंत सोरेन का पुतला फूंका। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता लंका गेट जुटे और प्रदर्शन किया। इस दौरान झारखंड सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

रिजल्ट जारी होने के बाद कैसे बढ़ा विवाद?

20 जून को JPSC ने सहायक लोक अभियोजक (APP) भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी किया। रिजल्ट को लेकर आयोग के दो सदस्यों ने परीक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए और रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे।

2 जुलाई की देर रात 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया। 103 राजपत्रित पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया।

इस रिजल्ट पर भी आयोग के तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोग के सदस्य एजेंसी द्वारा तैयार की गई चयन प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं थे। हालांकि, JPSC ने रिजल्ट जारी कर दिया।

रिजल्ट के साथ कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए जाने पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए।

14वीं सिविल सेवा पीटी-2025 में क्या है विवाद?

JPSC ने 14वीं (PT) परीक्षा के लिए 29 जनवरी को 103 पदों पर विज्ञापन जारी किया था। 31 जनवरी से 9 मार्च तक आवेदन लिए गए। 19 अप्रैल को प्रारंभिक परीक्षा हुई और 20 अप्रैल को मॉडल आंसर-की जारी की गई। अभ्यर्थियों से 24 अप्रैल तक आपत्तियां मांगी गईं।

मॉडल आंसर-की को लेकर भी विवाद हुआ और मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 30 जून को रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया। इसके बाद 2 जुलाई की रात JPSC ने रिजल्ट जारी कर दिया और मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम भी घोषित किया।

रिजल्ट में 2,204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया, लेकिन कटऑफ अंक जारी नहीं किए गए। अभ्यर्थियों ने चयन के आधार पर सवाल उठाए। पिछली परीक्षाओं में रिजल्ट के साथ कटऑफ जारी किए जाने का भी हवाला दिया गया।

मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी TDPL झारखंड के मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि हैं।

मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी TDPL झारखंड के मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि हैं।

विवाद के केंद्र में क्यों आई TDPL?

रिजल्ट विवाद के बीच JPSC की परीक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) का नाम सामने आया।

आयोग ने भर्ती परीक्षाओं में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) से लेकर अंतिम रिजल्ट प्रोसेसिंग तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इसी एजेंसी को दी थीं।

परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग काम अलग-अलग एजेंसियों को सौंपे जाते हैं। प्री-प्रोसेसिंग, पोस्ट-प्रोसेसिंग, कॉन्फिडेंशियल प्रिंटिंग, डेटा प्रोसेसिंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसे कामों को अलग रखने का उद्देश्य यह होता है कि परीक्षा प्रक्रिया का नियंत्रण किसी एक एजेंसी के पास न रहे। लेकिन JPSC ने एक ही एजेंसी को सरी जिम्मेदारी दी गई।

JPSC में TDPL के पास कौन-कौन से काम थे?

TDPL को परीक्षा प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण चरणों की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें शामिल हैं:

  • वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR)
  • ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग
  • एडमिट कार्ड जेनरेशन
  • क्वेश्चन पेपर प्रिंटिंग
  • OMR शीट और आंसर बुकलेट प्रिंटिंग
  • OMR स्कैनिंग
  • ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (OSM)
  • रिजल्ट प्रोसेसिंग
झारखंड विधानसभा में भी छात्रों का मामला उठा। चल रहा मानसून सत्र एक दिन पहले ही खत्म कर दिया गया।

झारखंड विधानसभा में भी छात्रों का मामला उठा। चल रहा मानसून सत्र एक दिन पहले ही खत्म कर दिया गया।

यानी आवेदन से लेकर परीक्षा, मूल्यांकन और रिजल्ट तक की प्रक्रिया के कई अहम हिस्से एक ही एजेंसी के दायरे में थे। इसी को लेकर परीक्षा की पारदर्शिता और हितों के टकराव को लेकर सवाल उठाए गए।

उत्तर प्रदेश में भी विवादों में रही है TDPL

TDPL का नाम उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित अनियमितता के मामलों में भी सामने आ चुका है। इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से ऐसी टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई है, जिसमें राज्य सरकार से भविष्य में राज्य की भर्ती परीक्षाओं और विभिन्न सरकारी संस्थानों की चयन प्रक्रिया का काम इस एजेंसी को नहीं सौंपने की बात कही गई थी।

इसी आधार पर झारखंड में इस एजेंसी को काम दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

शिकायत के बाद और गहराया विवाद

मामला तब और गंभीर हो गया, जब परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक शिकायत पत्र मुख्यमंत्री तक पहुंचा। शिकायत में आरोप लगाया गया कि JPSC के इतिहास में पहली बार किसी एक एजेंसी को नियुक्ति परीक्षा के कई संवेदनशील चरणों की जिम्मेदारी दी गई।

आवेदन से लेकर परीक्षा, मूल्यांकन और रिजल्ट तक की पूरी चेन एक ही एजेंसी के नियंत्रण में होने के आरोप ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए।

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने परीक्षाओं में अनियमितता के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।

सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने परीक्षाओं में अनियमितता के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।

JPSC में छापेमारी के बाद सामने आया नया मोड़

विवाद बढ़ने के बाद CID और रांची पुलिस ने JPSC में छापेमारी की। इसके साथ ही TDPL से जुड़े ठिकानों पर भी जांच की गई।

जांच के दौरान JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई। गिरफ्तार लोगों में TDPL झारखंड के मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी भी शामिल हैं।

जांच एजेंसियों ने आरोपियों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ में परीक्षा एजेंसी के चयन और परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।

जांच के मुताबिक, JPSC ने TDPL को बिना किसी निविदा के नामिनेशन के आधार पर परीक्षा से जुड़े काम सौंपे थे। हालांकि, मामले में जांच और पूछताछ अभी जारी है, इसलिए सामने आए आरोपों और दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

कौन है मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी?

मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर और झारखंड में कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर काम करता था।

सरकारी दस्तावेजों में वह अभय कुमार तिवारी के नाम से जाना जाता है, जबकि TDPL में वह मनोज कुमार तिवारी के नाम से काम करता था।

वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। सरकारी नौकरी से पहले उसके TDPL से जुड़े होने की बात भी सामने आई है।

TDPL लखनऊ स्थित कंपनी है, जो झारखंड में JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी रही है। कंपनी को उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में ब्लैकलिस्ट किए जाने का भी उल्लेख जांच से जुड़े मामलों में सामने आया है।

CID के अनुसार, अभय तिवारी ने करीब 13 साल के दौरान 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।

अभ्यर्थियों का भरोसा कैसे जीतता था अभय?

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, अभय कुमार तिवारी के खुद कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने की बात को अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर अभ्यर्थियों से संपर्क किया जाता था और पैसे लेकर परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर की जाती थी।

जांच में OMR शीट में बदलाव, आंसर-की में हेरफेर और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने जैसे आरोपों की भी जांच की जा रही है।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल क्या?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ एक परीक्षा के रिजल्ट का नहीं है। सवाल यह है कि क्या किसी एक निजी एजेंसी को भर्ती परीक्षा के इतने संवेदनशील चरणों की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी?

दूसरा सवाल यह है कि अगर एजेंसी पर पहले से दूसरे राज्य में कार्रवाई या ब्लैकलिस्ट किए जाने का रिकॉर्ड था, तो उसकी जानकारी के बावजूद उसे झारखंड में परीक्षा से जुड़े काम कैसे मिले?

और तीसरा सवाल यह है कि आयोग के सदस्यों की आपत्ति के बावजूद रिजल्ट क्यों जारी किया गया?

इन्हीं सवालों के जवाब अब जांच, दस्तावेजों और आगे की कानूनी कार्रवाई से सामने आने हैं।



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