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झारखंड सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को घर बनाने के लिए अब विभागों में टेबल-दर-टेबल चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राज्य सरकार ने गृह निर्माण अग्रिम की पूरी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से ऑनलाइन कर दी है। अब नए ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह निर्माण अग्रिम की प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और डिजिटल बनाने के लिए वित्त विभाग ने ‘कुबेर लोन पोर्टल’ तैयार किया है। ऐसे काम करेगा नया ऑनलाइन सिस्टम कर्मचारी को अपनी लॉगिन आईडी से पोर्टल पर जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन से मंजूरी तक प्रक्रिया पांच स्तरों से गुजरेगी… पहला स्तर: डीडीओ की जांच आवेदन सबमिट होते ही डीडीओ को कुबेर पोर्टल पर दिखेगा। डीडीओ दस्तावेजों की जांच करेंगे और भारमुक्त प्रमाणपत्र व सरकारी अधिवक्ता की कानूनी राय के लिए पत्र जारी करेंगे। दोनों प्रमाणपत्र मिलने पर पोर्टल पर अपलोड कर आवेदन विभागीय मेकर को भेजा जाएगा। दूसरा स्तर: विभागीय जांच विभाग में प्रशाखा पदाधिकारी या सहायक प्रशाखा पदाधिकारी ‘मेकर’ और उप सचिव स्तर के अधिकारी ‘चेकर’ होंगे। मेकर की जांच के बाद चेकर फाइल को ऑनलाइन विधि विभाग भेजेंगे।
तीसरा स्तर: विधि विभाग की राय विधि विभाग में सहायक प्रशाखा/प्रशाखा पदाधिकारी लीगल ओपिनियन मेकर और उप विधि परामर्शी स्तर के अधिकारी चेकर होंगे। विधि विभाग ऑनलाइन कानूनी राय देगा। चौथा स्तर: वित्त विभाग की जांच विधि विभाग से मंजूरी मिलते ही आवेदन सीधे वित्त विभाग की अग्रिम प्रशाखा को ट्रांसफर होगा। यहां लोन सेक्शन के मेकर और चेकर आवेदन की जांच करेंगे।
पांचवां स्तर: प्राधिकार की मंजूरी जांच के बाद फाइल सक्षम प्राधिकार के पास जाएगी। मंजूरी मिलते ही सिस्टम खुद स्वीकृति आदेश जारी करेगा। इसकी प्रति आवेदक को मिल जाएगी।
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