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अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के देशव्यापी दो दिवसीय सामूहिक अनशन सत्याग्रह कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को झारखंड ग्रामीण मजदूर सभा की रामगढ़ जिला इकाई ने सुभाष चौक के सामने एक दिवसीय अनशन सत्याग्रह किया। इसमें मुख्य रूप से भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन और कुशल मजदूरों को 700 रुपए मजदूरी देने की मांगें शामिल हैं। वहीं, सभा ने लोकसभा से पारित खान और खनन संशोधन विधेयक के खिलाफ 16-17 अगस्त 26 को प्रतिरोध मार्च निकालने की घोषणा भी की। सत्याग्रह को मुख्य रूप से सरयू बेदिया, भोला पासवान, लालकुमार बेदिया, संतोष मोदी, सुलचंद राम, तृतियाल बेदिया, शंकर मुंडा, कांति देवी, हीरोलाल मुंडा, लाका बेदिया, कुलदीप बेदिया, रामसिंह मांझी, विजय बेदिया सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। धरना को देवकीनंदन बेदिया, भुनेश्वर बेदिया, बिगेन्द्र ठाकुर, नरेश बडाईक, नागेश्वर मुंडा, रामबृक्ष बेदिया, सोहन बेदिया, लालचंद बेदिया, सुरेश बेदिया, करमा मांझी, देवानंद गोप ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी रामगढ़ के माध्यम से सौंपा गया। मांग पत्र में कहा गया कि जो गरीब जहां बसे हैं, उन्हें पी पी एक्ट 1947 के तहत वासगीत पर्चा दिया जाए। सभी भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन दी जाए। सभी पंचायतों में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी बनाई जाए। इंदिरा आवास की राशि 5 लाख की जाए। जमीन के मालिकाना कागज की शर्त वापस ली जाए। राशन सूची से गरीबों के नाम काटने का तुगलकी फरमान वापस लिया जाए। सभी गरीब परिवारों को राशन कार्ड दिया जाए। झारखंड सरकार अपने बजट से अपेक्षित दाल दे, ताकि कुपोषण पर लगाम लग सके। मांगों में विकसित भारत जी राम जी कानून के तहत काम देने, काम का उचित दाम देने, कुशल मजदूरों के लिए 700 रुपए दैनिक न्यूनतम मजदूरी घोषित करने की मांग रखी गई। प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, समान और रोजगार गारंटी का कानून बनाने की मांग की गई। गांव के मजदूर किसानों से पानी, सफाई और होल्डिंग टैक्स वसूलना बंद करने की मांग रखी गई। सभी वृद्धों, दिव्यांग और विधवाओं को 3000 रुपए मासिक पेंशन देने की मांग की गई। शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग रखी गई। सरकारी विद्यालयों को नवोदय विद्यालय के स्तर पर विकसित करने की मांग की गई। झारखंड में सुखाड़ क्षेत्र घोषित करने, ग्रामीण गरीब मजदूरों को रोजगार देने की मांग रखी गई। एसआईआर में किसी भी गरीब का नाम न छूटे, यह मांग भी रखी गई। जमीनों को ऑनलाइन कर रसीद निर्गत करने, गरीबों और आदिवासियों को वन पट्टा, बंदोबस्ती देने की मांग की गई। बिजली का निजीकरण करने और स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने की मांग रखी गई।
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