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North Koyal river flood: झारखंड के पलामू में उत्तरी कोयल नदी का उफान लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है. लगातार बारिश के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और मेदिनीनगर के निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक कोयल का ऐसा रौद्र रूप लंबे समय बाद देखने को मिला है. कई इलाकों में लोग घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर जाने को मजबूर हैं. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट बढ़ा दिया है और लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने की अपील की है.
उत्तरी कोयल के रौद्र रूप से सहमा पलामू
पलामू. झारखंड के पलामू प्रमंडल में प्रकृति का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल रहा है.पिछले कुछ दिनों से लातेहार, गुमला और लोहरदगा जैसे ऊपरी जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते उत्तरी कोयल नदी इतिहास के सबसे बड़े उफान पर है. पलामू की जीवनरेखा कही जाने वाली इस नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा है कि इसने पिछले एक दशक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जिला प्रशासन ने पूरी घाटी में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और निचले इलाकों को खाली कराया जा रहा है. स्थानीय लोग इस मंजर को देखकर सहमे हुए हैं, क्योंकि नदी का ऐसा उग्र रूप वर्तमान पीढ़ी ने पहले कभी नहीं देखा था.
10 साल का रिकॉर्ड टूटा, 1976 की यादें हुईं ताजा
स्थानीय मीडिया और जिला प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी कोयल नदी में साल 2016 के बाद यानी पूरे 10 साल बाद ऐसी भयानक बाढ़ आई है. हालांकि, डालटनगंज (मेदिनीनगर) के बुजुर्गों और प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि पानी का यह वेग और फैलाव साल 1976 यानी करीब 50 साल पहले आई ऐतिहासिक बाढ़ से भी कहीं अधिक खतरनाक है. यही वजह है कि पूरे इलाके में चर्चा है कि कोयल नदी अपने 50-60 सालों के सबसे बड़े उफान पर है. स्थानीय लोग डरे सहमे हैं और कह रहे हैं कि नदी की तेज लहरें अपने साथ सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा दिख रही हैं.
पलामू में उत्तरी कोयल का रौद्र रूप, कोयल रिवर फ्रंट डूबा, नदी किनारे जाने पर प्रशासन की रोक
मेदिनीनगर के निचले इलाके डूबे, रिवर फ्रंट जलमग्न
अचानक जलस्तर बढ़ने से मेदिनीनगर शहर के कांदू मोहल्ला, पहाड़ी मोहल्ला, मुस्लिम नगर और गिरवर स्कूल रोड जैसे घनी आबादी वाले निचले इलाकों में तबाही मच गई है. करीब 200 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लोग अपनी जान और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं. शहर का मशहूर पर्यटन स्थल ‘कोयल रिवर फ्रंट’ पूरी तरह से पानी में डूब चुका है. इसके अतिरिक्त, शाहपुर को मेदिनीनगर से जोड़ने वाले मुख्य पुल के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बन गई है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप होने की कगार पर है.
प्रशासन का हाई अलर्ट और बचाव कार्य
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए पलामू उपायुक्त और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. प्रभावित तटीय इलाकों में लाउडस्पीकर से लगातार माइकिंग कराई जा रही है, ताकि लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं. एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीमों को चौबीसों घंटे तैनात रखा गया है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सेल्फी लेने या तमाशा देखने के लिए नदी के पुलों या किनारों पर बिल्कुल न जाएं.
उत्तरी कोयल ने बदला रूप, मेदिनीनगर में बाढ़ का खतरा बढ़ा, 1976 की बाढ़ को याद कर रहे बुजुर्ग
क्या है कोयल नदी का समृद्ध इतिहास?
बता दें कि धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से उत्तरी कोयल नदी का छोटानागपुर पठार में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. यह नदी रांची के पठार यानी लोहरदगा जिले के पाट क्षेत्र से निकलती है और लातेहार, पलामू होते हुए अंत में सोन नदी में मिल जाती है. इस नदी को पलामू संभाग की रीढ़ या फिर जीवन रेखा माना जाता है, क्योंकि सदियों से यह क्षेत्र की कृषि और अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है. इसके साथ ही इस नदी का पलामू के प्रसिद्ध ऐतिहासिक चेरो राजाओं का ‘पलामू किला’ और शाहपुर का किला इसी कोयल नदी के तट पर स्थित हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं. वहीं, इसको लेकर पौराणिक मान्यताएं भी हैं और स्थानीय लोककथाओं और इतिहास में कोयल नदी को अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसका जल इस क्षेत्र की मिट्टी को उपजाऊ बनाता है.
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