Nag Panchami 2026 Today: आज यानी 17 अगस्त दिन सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है. खास बात यह है कि इस बार नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ रहे हैं, ऐसा दुर्लभ संयोग 23 वर्षों बाद बन रहा है. सावन सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है. ऐसे में शिव आराधना और नाग पूजा का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति आती है और कालसर्प, पितृ समेत सभी दोषों के अशुभ प्रभाव में कमी भी आती है. आइए जानते हैं नाग पंचमी का महत्व, पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और कालसर्प दोष के उपाय…
नाग पंचमी 2026 आज
पंचमी तिथि का आरंभ: 16 अगस्त की शाम 4 बजकर 54 मिनट से
पंचमी तिथि समापन: 17 अगस्त की शाम 5 बजकर 02 मिनट तक
उदिया तिथि को मानते हुए नाग पंचमी का पर्व आज यानी 17 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा.
नाग पंचमी का महत्व
हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवताओं की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता की पूजा करने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और भय, बाधाओं तथा नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है. साथ ही कालसर्प दोष, पितृ दोष समेत कई अन्य दोषों के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए सावन में नाग पंचमी के दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर दूध, पुष्प, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करते हैं. नाग पंचमी हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है. इस दिन जीवित सांपों को नुकसान पहुंचाने या उनके साथ छेड़छाड़ करने के बजाय नाग देवता की प्रतीकात्मक पूजा करना उचित माना जाता है.
नाग पंचमी पर शुभ योग 2026
नाग पंचमी पर आज सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी किया जा रहा है. नाग पंचमी और सावन सोमवार का व्रत एक ही दिन होना बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है, यह संयोग 23 साल बाद बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. साथ ही इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग, रवि नामक योग भी बन रहा है. इन शुभ योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा अर्चना करने से कालसर्प दोष, पितृ समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति भी आती है. इन शुभ योग के साथ गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग भी बन रहा है.
नाग पंचमी पूजन मुहूर्त 2026
नाग पंचमी पर पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक है. आपको नाग देवता की पूजा के लिए 2 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा. इस अवधि में आप विधि विधान के साथ नाग देवता के साथ महादेव की आराधना भी कर सकते हैं और कालसर्प दोष, पितृ दोष समेत नाग संबंधी सभी दोषों के लिए पूजा व उपाय कर सकते हैं. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ रहेगा.
ब्रह्म मुहूर्त: 04:25 ए एम से 05:09 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:52 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:37 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 06:59 पी एम से 07:21 पी एम
रवि योग: 05:52 ए एम से 08:04 ए एम
नाग पंचमी पूजा विधि 2026
आज सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव तथा नाग देवता का ध्यान करें. सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक करें. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, पुष्प और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर गंध, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें. धार्मिक परंपरा के अनुसार अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया आदि नागों का स्मरण किया जाता है. नाग पंचमी के दिन जीवित सांप को पकड़कर या उसके मुंह में दूध डालकर पूजा नहीं करनी चाहिए. नाग देवता की पूजा प्रतीकात्मक रूप से चित्र या प्रतिमा के सामने करना सुरक्षित और उचित है.
नाग पंचमी का मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्.
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
इस मंत्र में प्रमुख नाग देवताओं का स्मरण किया जाता है. इसके साथ भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय भी श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है.
नाग पंचमी पर करें कालसर्प दोष के उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी को कालसर्प दोष से संबंधित शांति उपायों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करके महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना, नाग देवता की पूजा करना और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है. कुछ परंपराओं में चांदी या मिट्टी के नाग की पूजा का भी विधान बताया गया है.
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- नाग पंचमी के दिन चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें.
- नाग पंचमी के दिन जरूरतमंदों, गरीबों और साधुओं को भोजन, वस्त्र व अन्न का दान करें.
- किसी भी जीव या सांप को नुकसान ना पहुंचाएं.