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रास्ते मुश्किल थे, मंजिल थी बाबा का दरबार… खगड़िया से 105 KM...


देवघर. श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु देवघर पहुंच रहे हैं. कोई पैदल चलकर बाबा धाम आ रहा है, तो कोई कांवर लेकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है. लेकिन इन श्रद्धालुओं के बीच कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी भक्ति का तरीका लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है. ऐसे ही एक श्रद्धालु हैं खगड़िया के रहने वाले रूपेश कुमार. रूपेश कुमार अपनी अलग तरह की भक्ति लेकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे हैं. उन्होंने सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर का सफर स्केटिंग करते हुए पूरा किया है. रूपेश का कहना है कि वह अपनी इसी कला के जरिए बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा जताना चाहते थे.

क्या कहते हैं रूपेश कुमार
रूपेश कुमार ने बताया कि उन्हें बचपन से ही स्केटिंग करने का काफी शौक रहा है. स्केटिंग उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि वह इसे अपना करियर भी बनाना चाहते थे. उन्होंने स्केटिंग में आगे बढ़ने और अपना हुनर दिखाने की कोशिश भी की, लेकिन सही मौका नहीं मिल पाने के कारण उनका सपना आगे नहीं बढ़ सका. इसके बावजूद उन्होंने स्केटिंग करना नहीं छोड़ा. जब सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम आने का मौका मिला तो उनके मन में एक अलग विचार आया. उन्होंने सोचा कि क्यों न जिस कला को वह इतना पसंद करते हैं, उसी कला को बाबा भोलेनाथ के चरणों में समर्पित किया जाए. इसके बाद उन्होंने सुल्तानगंज से स्केटिंग करते हुए देवघर पहुंचने का फैसला किया.

कई तरह की परेशानियों का करना पड़ा सामना
सुल्तानगंज से देवघर की दूरी करीब 105 किलोमीटर है और इस रास्ते में कांवरियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आम तौर पर लोग पैदल चलकर इस दूरी को पूरा करते हैं, लेकिन स्केटिंग करते हुए इतनी लंबी दूरी तय करना अपने आप में काफी चुनौती भरा था. रूपेश ने बताया कि रास्ते में कई जगह सड़क ठीक नहीं थी. कहीं कच्ची सड़क मिली, तो कहीं सड़क पर फिसलन थी. कई जगह रास्ते की स्थिति ऐसी थी कि स्केटिंग करना काफी मुश्किल हो गया. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार आगे बढ़ते रहे.

दो दिनों में स्केटिंग करते हुए पूरा किया सफर
रूपेश कुमार ने बताया कि करीब दो दिनों में उन्होंने स्केटिंग करते हुए यह सफर पूरा किया. रास्ते में थकान भी हुई और कई बार परेशानी भी सामने आई, लेकिन मन में एक ही बात थी कि किसी भी तरह बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचना है. उन्होंने कहा कि जब रास्ते में दूसरे कांवरियों और श्रद्धालुओं ने उन्हें स्केटिंग करते हुए देखा तो कई लोगों ने रुककर उनका हौसला बढ़ाया. कुछ लोगों ने उनसे बात की और उनकी इस यात्रा के बारे में जानकारी ली. लोगों का उत्साह देखकर उनका हौसला और बढ़ता गया.

बाबा के दरबार में पहुंचने के बाद सारी थकान हुई दूर
रूपेश के लिए यह यात्रा सिर्फ सुल्तानगंज से देवघर तक पहुंचने की यात्रा नहीं थी, बल्कि यह उनके लिए अपनी पसंद और अपनी भक्ति को एक साथ जोड़ने का मौका भी था. जिस स्केटिंग को वह अपने करियर के रूप में देखना चाहते थे, उसी स्केटिंग के जरिए उन्होंने बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था जताई. उनका कहना है कि बाबा के दरबार तक पहुंचने के बाद उन्हें अलग ही खुशी महसूस हुई. रास्ते की सारी थकान जैसे बाबा के दर्शन के बाद दूर हो गई.

आसपास श्रद्धालुओं में दिखी उत्सुकता
रूपेश कुमार की इस अनोखी यात्रा को देखकर आसपास मौजूद श्रद्धालुओं में भी काफी उत्सुकता देखने को मिली. श्रावणी मेले में वैसे तो हर दिन अलग-अलग तरह के कांवर और अनोखी भक्ति देखने को मिलती है, लेकिन स्केटिंग करते हुए 105 किलोमीटर का सफर तय कर बाबा धाम पहुंचना लोगों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है. रूपेश का कहना है कि बाबा भोलेनाथ से उनकी यही प्रार्थना है कि उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले और वह स्केटिंग में अपना नाम बना सकें. उन्होंने कहा कि अगर मौका मिला तो वह आने वाले समय में भी अपनी इस कला को आगे बढ़ाएंगे और बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा इसी तरह जताते रहेंगे.

जुनून, मेहनत और आस्था
श्रावणी मेले में दूर-दूर से आने वाले ऐसे श्रद्धालु यह दिखा रहे हैं कि बाबा भोलेनाथ के प्रति आस्था जताने का तरीका हर किसी का अलग हो सकता है. किसी के कंधे पर कांवर है, कोई नंगे पैर चल रहा है, तो कोई अपनी कला और हुनर को बाबा को समर्पित कर रहा है. खगड़िया के रूपेश कुमार की यह स्केटिंग यात्रा भी इसी आस्था की एक अलग तस्वीर है, जिसमें जुनून, मेहनत और बाबा भोलेनाथ के प्रति विश्वास तीनों एक साथ नजर आते हैं.



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