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Organic Waste Series-10: सीईईडब्ल्यू की प्रियंका सिंह ने कचरा प्रबंधन की जरूरत के बारे में बताया है. अगर गीले कचरे को सिर्फ फेंकते रहें और उसका प्रबंधन न हो तो उससे PM2.5 उत्सर्जन में 10% योगदान होता है. 1994-2020 में कचरा उत्सर्जन 226% बढ़ा है. यह चौथा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है.
Organic Waste series-10: कचरा फेंकना ही काफी? मैनेजमेंट न हो तो क्या होगा? एक्सपर्ट प्रियंका ने बताया
Organic Waste Series-10: आपके घर में कूड़ा कचरा होता है तो आप उसे डस्टबिन में इकठ्ठा करते हैं और फिर रोजाना सुबह जब कचरा ले जाने वाली गाड़ी आती है तो उसे डाल देते हैं. अगर कभी गलती से एक दो दिन कचरा घर में ही रखा रह जाए तो बदबू आने लगती है, घर का माहौल ही खराब होने लगता है, लेकिन आप भले ही घर से बाहर कचरा निकालकर अच्छा महसूस करते हों, पर क्या कभी आपने सोचा है कि इस कचरे का क्या होता है? अगर इस कचरे को ले जाकर कहीं फेंक दिया जाए और वह वहां इकठ्ठा होता रहे तो कितने शहर के शहर इससे भर जाएंगे? तो आइए जानते हैं…
कचरे को फेंकने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? गीले कचरे के सिर्फ ढेर लगाना और उसे ठिकाने न लगाने का क्या असर होता है? वेस्ट मैनेजमेंट कितना जरूरी है? जैविक कचरे का जलवायु परिवर्तन से क्या रिश्ता है और लोगों को कैसे ये बात समझाएं? सीईईडब्ल्यू की एक्सपर्ट प्रियंका सिंह दे रही हैं जानकारी
गीले कचरे की सीरीज पर विस्तार से जानकारी दे रही हैं सीईईडब्ल्यू की प्रियंका सिंह.
न्यूज18हिंदी की गीला कचरा सीरीज की आखिरी कहानी में सीनियर प्रोग्राम लीड सीईईडब्ल्यू प्रियंका सिंह कहती हैं कि भारतीय शहरों में खुले में कचरा जलाने की घटनाएं PM2.5 उत्सर्जन में करीब 10 प्रतिशत का योगदान देती हैं. 1994 से 2020 के बीच कचरा क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में लगभग 226 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. अब यह देश का चौथा सबसे बड़ा उत्सर्जन योगदानकर्ता बन गया है.
सामान्य स्थिति में इस क्षेत्र से होने वाला उत्सर्जन 2047 तक 119.5 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के लगभग पहुंच सकता है. लेकिन अगर तेज नीति या महत्वाकांक्षी हरित परिवर्तन का रास्ता अपनाया जाए तो यह उत्सर्जन नेगेटिव हो सकता है यानी -67.5 या -100.5 मिलियन टन तक. नेट-नेगेटिव का मतलब है कि कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर बढ़ने की बजाय उसमें गिरावट आएगी.
कचरा प्रबंधन का महत्व समझाने, लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने और ‘कचरा मेरे घर के पास न हो’ वाली सोच खत्म करने के लिए शहरों को जमीनी स्तर पर सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियां शुरू करनी चाहिए. इसके लिए घर-घर जाकर संपर्क करना, जागरूकता कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों और आध्यात्मिक नेताओं को जोड़ना, लोगों का भरोसा जीतने के लिए पारदर्शी प्रदर्शन परियोजनाएं बनाना और मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी चाहिए.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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